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सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर हंगामे के राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

नई दिल्ली 01 दिसम्बर। राज्‍यसभा में आज 12 सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही आज कई बार बाधित होने के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

आज दोपहर तीन बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो पीठासीन अधिकारी ने बांध सुरक्षा विधेयक-2019 पर चर्चा कराने का प्रयास किया और केन्‍द्रीय जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से इस विधेयक पर चर्चा शुरू करने को कहा, लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके पार्टी और राष्‍ट्रीय जनता दल सहित विपक्षी सदस्यों ने सांसदों के निलंबन का मुद्दा उठाया। कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जबकि तेलंगाना राष्‍ट्र समिति के सदस्यों ने न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य-एमएसपी सहित किसानों का मु्द्दा उठाया।

पीठासीन अधिकारी ने विपक्षी सदस्यों से सदन को चलने देने का आग्रह किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी को सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

इससे पहले दोपहर दो बजे दूसरे स्थगन के बाद जब सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई तो सदन में स्थिति वैसी ही रही। उपसभापति हरिवंश ने सदन को चलाने का प्रयास किया। उन्‍होंने सदस्यों से बांध सुरक्षा विधेयक, 2019 पर चर्चा करने की अपील की और जब केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने विधेयक पर बोलना शुरू किया तो कांग्रेस तथा टीएमसी समेत विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद उपसभापति ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

इससे पहले, जब दोपहर 12 बजे सदन फिर से शुरू हुआ, तो उपसभापति हरिवंश ने सदस्यों से अपील की कि वे सदन को प्रश्नकाल के दौरान सूचीबद्ध प्रश्नों को लेने की अनुमति दें। लेकिन कांग्रेस, टीएमसी और वाम दलों सहित विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। उपसभापति ने विपक्ष के सदस्यों से कहा कि राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू पहले ही सुझाव दे चुके हैं कि सदन के नेता और विपक्ष के नेता को एक बैठक करनी चाहिए और इस मुद्दे को हल करने के तरीके खोजने चाहिए।

जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्ष ने 12 सदस्यों के निलंबन का मुद्दा उठाया। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने विपक्ष से सदन में हंगामा नहीं करने और इसे चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि 12 निलंबित सदस्यों ने अब तक अपने खराब आचरण के लिए खेद व्यक्त नहीं किया है जिससे सदन की छवि खराब हुई है।