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राज्यसभा ने रिटायर होने वाले अपने 60 सदस्यों को दी विदाई

नई दिल्ली 28 मार्च।राज्यसभा ने 17 राज्यों के  60 रिटायर हो रहे सदस्यों को भावभीनी विदाई दी। इन सदस्यों का कार्यकाल इस वर्श अप्रैल और जुलाई के बीच पूरा हो रहा है।इनमें राज्यसभा के चार मनोनीत सदस्य भी हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि राज्यसभा संसद का प्रतिष्ठित सदन है और देश के लोकतंत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होने कहा कि..सदन में से जो जाने वाले महानुभाव हैं उनका अपना हरेक का योगदान है हरेक का अपना महत्व है और हर किसी ने राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस सदन में रहते हुए जो भी योगदान कर सकते हैं, करने का प्रयास किया है और उन सबको राष्ट्र कभी भूल नहीं सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों ने अपने अनुभव और ज्ञान से संसद में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि तीन तलाक जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पर फैसला करते समय ये सदस्य सदन में मौजूद नहीं रहेंगे।

उऩ्होने कहा कि..अच्छा होता आखिर आखिर में कोई उत्तम चीजें छोड़ करके जाने का अवसर मिल गया होता, तो आपको एक विशेष संतोष होता, लेकिन शायद इस सदन का ही कारण रहा कि आप वो सौभाग्य से वंचित रह गए। ट्रिपल तलाक जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के हिन्दुस्तान के आने वाले इतिहास में बहुत बड़ी भूमिका अदा करने वाले हैं, उसका निर्णय करने वाली प्रक्रिया से आप वंचित रह गए..।श्री मोदी ने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले इन सदस्यों के सुझावों के लिए उनके कार्यालय के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे।

सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि इन सदस्यों के योगदान से सदन में सार्थक और जीवंत चर्चा हुई और संसदीय समितियों में उनका अमूल्य योगदान रहा।सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में शामिल उपसभापति प्रोफेसर पी.जे. कुरियन ने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतंत्र के आदर्शों को बनाए रखे।

सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह विदाई तो केवल औपचारिकता मात्र है।