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यात्राओं की बाढ़ में ‘सियासी नैया’ पार लगाने की होड़ – अरुण पटेल

अरूण पटेल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा महाकाल की नगरी उज्जैन से निकाली गई जन-आशीर्वाद यात्रा को अच्छा-खासा समर्थन मिल रहा है। जहां-जहां शिवराज जा रहे हैं वहां वहां उन्हें सुनने के लिए जनता का हुजूम उमड़ रहा है तथा उसके उत्साह पर बरसात की झड़ी भी खलल पैदा नहीं कर पा रही। लोग छाते लगा रहे हैं और घंटों इंतजार करते भी देखे जा रहे हैं। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की न्याय यात्रा का पांचवां चरण पूरा हो चुका है और उनकी यात्रा में भी खासकर बघेलखंड और बुंदेलखंड में लोगों का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। आम आदमी पार्टी भी कुछ यात्राएं निकाल चुकी है और सितम्बर माह में उसके मुख्यमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार आलोक अग्रवाल की अगुवाई में एक और प्रदेशव्यापी यात्रा निकालने की तैयारियां चल रही हैं। कांग्रेस अगस्त माह से जनता के बीच यात्राओं तथा अन्य माध्यमों से मैदान में उतरने का तानाबाना भी बुन रही है। शिवराज की यात्रा का आगाज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने किया था तो कांग्रेस की यात्रा का आगाज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी करने वाले हैं। कुछ यात्राओं में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के दो चेहरे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी रहेंगे और उसके बाद अलग-अलग ये दोनों नेता मैदान में नजर आयेंगे। भाजपा और कांग्रेस की सियासी यात्राओं के बीच एक नई और यात्रा निकलने जा रही है। चूंकि मध्यप्रदेश में सत्ता की राह आदिवासियों के बीच से होकर गुजरती है, इस बात को समझते हुए जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन ‘जयस’ 29 जुलाई से आदिवासी अधिकार यात्रा का आगाज करने जा रहा है। यह यात्रा प्रदेश के सभी 47 आदिवासी विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी और वहां सामाजिक मुद्दों पर राजनीति को अपने ढंग से प्रभावित करने की कोशिश करेगी। इस प्रकार अब चुनाव होने तक प्रदेश में यात्राओं की बाढ़ से ‘सियासी नैया’ पार लगाने की होड़ राजनीतिक दलों में लग गई है और इसमें कोई दल पीछे नहीं रहेगा।

मध्यप्रदेश में चुनावी गतिविधियां धीरे-धीरे तेज होती जा रही हैं। फिलहाल तो शिवराज पूरी ताकत के साथ अपनी सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ ही कांग्रेस पर आरोपों की झड़ी लगा रहे हैं और उसके साथ ही लोगों को यह भी भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि चौथी बार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती है तो उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी। शिवराज की जन-आशीर्वाद यात्रा दिन-प्रतिदिन प्रभावी होती जा रही है और उनकी बातों का कितना असर मतदाताओं पर पड़ा यह तो बाद में ही पता चलेगा लेकिन वे अपनी ओर से आने वाला मध्यप्रदेश कैसा होगा उसकी झलक भी पेश करते जा रहे हैं। कांग्रेस ने अभी तक कोई ऐसी बड़ी प्रभावी यात्रा आरंभ नहीं की है जो इसकी फिलहाल काट करती नजर आये। लेकिन शिवराज की यात्रा के पीछे-पीछे प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष विधायक जीतू पटवारी की अगुवाई में पोल खोल यात्रा चल रही है। यह यात्रा कितना असर छोड़ पायेगी इसका अभी आकलन होना अभी शेष है, लेकिन कुछ अवसरों पर उन्होंने कुछ ऐसी बातें कही हैं जो पार्टी को मजबूत करने की जगह उसे कमजोर कर सकती हैं। कांग्रेस अगस्त से शिवराज की जन-आशीर्वाद यात्रा की काट के लिए जो यात्रा निकालेगी या अन्य माध्यमों से जनता के बीच जायेगी उसमें वह शिवराज सरकार पर आरोपों की झड़ी लगाने के साथ ही यूपीए सरकार की जिन योजनाओं का प्रदेश में नाम बदल दिया गया है उनका ब्यौरा जनता को देगी। कांग्रेस जो रणनीति बना रही है उसमें उसका पूरा जोर राहुल गांधी के उस वायदे पर होगा जो उन्होंने किसानों से किया है कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद किसानों के कर्ज माफ कर दिए जायेंगे। इसके साथ ही यदि सरकार बनती है तो उसकी अन्य प्राथमिकताएं क्या होंगी इस पर भी पूरा फोकस होगा।

शिवराज कांग्रेस को दिग्विजय सिंह के 10 साल के कार्यकाल को लेकर जहां कटघरे में खड़ा करने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहे हैं वहीं इस मुद्दे को विशेषतौर पर उछाल रहे हैं कि विपक्ष यह बताये कि प्रदेशवासियों को उस दौरान बिजली, पानी, सड़क और मकान से क्यों वंचित किया गया। अपनी यात्रा को वे जनता की जिंदगी बदलने का अभियान बताते हुए यह भी रेखांकित कर रहे हैं कि यदि उन्हें एक मौका और मिला तो वे किस प्रकार से लोगों की जिन्दगी में बदलाव लायेंगे तथा प्रदेश को प्रगति के पथ पर ले जायेंगे। शिवराज कुछ ऐसे सवाल पूछ रहे हैं जिनका जवाब शायद आसानी से कांग्रेस न दे पाये क्योंकि दिग्विजय जब मुख्यमंत्री थे उस दौरान खासकर सड़क और बिजली की स्थिति दयनीय थी। दस साल ही नहीं बल्कि 50 साल के कांग्रेस के शासनकाल को लेकर शिवराज कह रहे हैं कि कांग्रेस को लोगों को यह बताना पड़ेगा कि उसके राज में सड़कें क्यों नहीं बनीं, गांवों तक बिजली क्यों नहीं पहुंची और किसानों को सिंचाई की सुविधा क्यों नहीं दी गयी तथा आजादी के इतने साल बाद भी आम आदमी झोपड़ी में रहने के लिए क्यों मजबूर है। उनकी बात भावनात्मक रूप से मतदाताओं के गले उतर जाए इसके लिए वे कहते हैं कि कांग्रेस के पास वह संवेदना ही नहीं है जो मानवता के कल्याण के लिए आवश्यक होती है। वे हर जगह इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जन-आशीर्वाद यात्रा हमारा वह अभियान है जो कि जनता की जिन्दगी के बदलाव में नया अध्याय लिखेगा। किसानों की आय को दुगुना करने का लक्ष्य पाने के लिए वे आगामी पांच साल के लिए जनता से जनादेश मांग रहे हैं और इसके साथ ही लोगों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दे रहे हैं। उपलब्धियों की फेहरिस्त भी वे जनता के सामने रख रहे हैं जिनमें प्रमुख हैं चालीस लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा देने और डेढ़ लाख किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाने तथा 19 हजार मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन करना शामिल है। जन-आशीर्वाद यात्रा प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में जायेगी। इस प्रकार शिवराज कांग्रेस की 60 वर्षों की नाकामियां सामने रखते हुए अपनी सरकार की साढ़े 14 वर्षों की उपलब्धियों को जनता के समक्ष रखकर उनसे आशीर्वाद मांग रहे हैं। उनका दावा है कि भाजपा सरकार ने गांव, गरीब और किसान की ईमानदारी से सेवा की है। बीमारू प्रदेश को हमने विकसित राज्य बनाया है।

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने 5 अप्रैल को अपनी न्याय यात्रा की शुरूआत की थी और पांचवें चरण तक उन्होंने 3270 किमी की दूरी तय कर शिवराज सरकार की विफलताओं को बताते हुए कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की है। उनकी यात्रा अधिकतर विंध्य अंचल में हुई है और बुंदेलखंड के अलावा महाकौशल के एक जिले और भोपाल के एक जिले को छोड़कर उनका सारा जोर फिलहाल विंध्य अंचल पर ही रहा है जहां विधानसभा की 30 सीटें आती हैं। अभी तक उन्होंने 75 जनसभाएं और आमसभाएं की हैं जो कि 51 विधानसभा क्षेत्रों में आती हैं। शिवराज अपने आपको किसान पुत्र के साथ ही किसानों के लिए अपनी सरकार का खजाना खोल देने का दावा कर रहे हैं तो वहीं अजय सिंह अपनी सभाओं में यह सवाल पूछ रहे हैं कि तीन एकड़ के किसान मुख्यमंत्री यह बतायें कि वे किस विधि से इसमें करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उनका सवाल है कि चौहान ऐसी कौन सी खेती करते हैं जिससे उन्हें करोड़ों की कमाई होती है, वहीं प्रदेश का किसान जो खेती पर ही आश्रित है वह आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है। अजय सिंह कह रहे हैं कि किसानों को मरने को मजबूर करने वाली और व्यापम घोटाला कर लाखों काबिल प्रतिभावान युवाओं का गला घोंटने वाली शिवराज सरकार को जनता का आशीर्वाद लेने का कोई अधिकार नहीं है, वे जनता के बीच आशीर्वाद लेने की बजाए प्रायश्चित करने जायें। पोल खोलो यात्रा के दौरान कार्यवाहक अध्यक्ष जीतू पटवारी इस बात को अपने अंदाज में व्यंग्यात्मक शैली में कह रहे हैं कि भाजपा सरकार को मोतियाबिन्द हो गया है और उसे प्रदेश की बदहाली की तस्वीर दिखाई नहीं दे रही है। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुणाल चौधरी प्रदेश सरकार पर बेरोजगारों के मुंह से रोटी छीनने का आरोप लगाते हुए दावा कर रहे हैं कि पिछले 15 वर्षों के भाजपा सरकार के कार्यकाल में यदि सबसे ज्यादा ज्यादती किसी के साथ हुई तो वह प्रदेश के नौजवान और बेरोजगार हैं।

इस समय शिवराज सिंह चौहान की जन-आशीर्वाद यात्रा की एक प्रकार से जगह-जगह धूम मची हुई है और लोग छाता लगाकर भी हजारों की संख्या में उनका भाषण सुन रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इस यात्रा पर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि जन-आशीर्वाद यात्रा, जन आशीर्वाद नहीं बल्कि कलाकारी की यात्रा है जिसमें लोगों को गुमराह करने का काम हो रहा है। कमल नाथ का कहना है कि इस यात्रा का नाम जन आशीर्वाद नहीं बल्कि जन आवेदन यात्रा होना चाहिए, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के आवेदन लेकर आ रहे हैं।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक एवं भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक है।