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म.प्र में किसने बनाया कोलारस उपचुनाव को सिंधिया बनाम सिंधिया – अरुण पटेल

अरूण पटेल

मध्यप्रदेश में मुंगावली और कोलारस विधानसभा उपचुनावों की लड़ाई एक प्रकार से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के मध्य प्रतिष्ठा की बन गई है। वैसे इन दोनों उपचुनावों में भाजपा के लिए खोने को कुछ नहीं है जबकि सिंधिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस की विजय पताका लहराना नाक का सवाल इसलिए बन गया है क्योंकि दोनों ही उपचुनाव कांग्रेसी विधायकों के निधन से रिक्त हुए स्थानों की पूर्ति के लिए हो रहे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो दोनों ही क्षेत्र कांग्रेस के लिए मजबूती वाले रहे हैं क्योंकि यहां कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार मोदी और शिवराज लहर के बावजूद बीस-बीस हजार से अधिक मतों से जीते थे। क्रिकेट की भाषा में कहा जाए तो अपेक्षाकृत अपने लिए प्रतिकूल पिच पर भाजपा पूरी शिद्दत से चुनाव लड़ रही है। उसकी कोशिश है कि दोनों नहीं तो कम से कम एक स्थान जीतकर सिंधिया को धीरे से जोर का झटका दिया जाए। कोलारस उपचुनाव सिंधिया बनाम सिंधिया यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ भाजपा सरकार की काबीना मंत्री यशोधराराजे सिंधिया के बीच तब्दील कर भाजपा ने यहां की लड़ाई को अब और भी दिलचस्प बना दिया है। सवाल यह है कि किसने इस लड़ाई को इस रूप में परिवर्तित किया। ऐसा समझा जाता है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अचानक पिछले दिनों राजधानी भोपाल में सक्रियता ने ही इस पटकथा को लिखने और मुंगावली में अशोकनगर जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष भाजपा नेता मलकीत सिंह के विद्रोह को थामने में अहम् भूमिका अदा की।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक चतुरसुजान राजनेता हैं और उन्हें भी इसमें राजनीतिक दृष्टि से फायदा नजर आया इसलिए कोलारस विधानसभा उपचुनाव का प्रभारी श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया को बना दिया। यदि यह सीट भाजपा की झोली में जाती है तो उसका श्रेय हर-हाल में शिवराज के खाते में जायेगा और यदि यहां भाजपा नहीं जीत पाती तो यह कहा जाएगा कि वहां भाजपा का यशोधरा कार्ड भी नहीं चल पाया। कोलारस और मुंगावली सीटें जीतना भले ही भाजपा के लिए आसान नजर नहीं आ रहा हो लेकिन सीटों को बचाने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। अब इन दोनों क्षेत्रों में सिंधिया ने एक प्रकार से डेरा डाल दिया है और वे पूरी ताकत यहां लगा रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेता भी उनकी मदद के लिए यहां आने वाले हैं ताकि यह संदेश न जाने पाये कि कांग्रेस यहां एकजुट नहीं है। मुंगावली विधानसभा उपचुनाव पहले कांग्रेस के लिए काफी आसान नजर आ रहा था लेकिन वहां ज्योतिरादित्य सिंधिया के सांसद प्रतिनिधि के.पी. सिंह यादव और उनकी पत्नी ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया और भाजपा के प्रचार में सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस को उम्मीद थी कि भाजपा नेता व पूर्व अशोकनगर जिला पंचायत अध्यक्ष मलकीत सिंह के विद्रोह से उसे मदद मिलेगी, लेकिन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रयास कर लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह के माध्यम से मलकीत सिंह से संपर्क कर उनके विद्रोही तेवरों को न केवल शान्त कराया बल्कि उन्हें पार्टी के पक्ष में सक्रिय करने में भी अहम् भूमिका अदा की। इस प्रकार कांग्रेस की राह में कुछ कांटे बिछाने में भाजपा सफल रही है।

कोलारस उपचुनाव जीतने की भाजपा पूरी कोशिश कर रही है। शिवपुरी जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं में यशोधराराजे सिंधिया के प्रति काफी सम्मान है। यशोधराराजे नाराज थीं और एक प्रकार से रूठ कर कोपभवन में बैठी रहीं। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि उन्होंने कोलारस से दूरी बना रखी थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के यहां पर जितने भी बड़े आयोजन हुए थे उसमें यशोधराराजे उनके साथ नजर नहीं आयी थीं, जबकि कार्यकर्ताओं की निरन्तर मांग थी कि उन्हें यहां सक्रिय किया जाए। पहली बार यशोधराराजे सिंधिया भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन के नामांकन के समय प्रकट हुईं और भोपाल से मुख्यमंत्री के साथ जब वे यहां आईं तब केन्द्रीय मंत्री तोमर भी साथ थे। शिवराज और यशोधरा के बीच जमी बर्फ को पिघलाने में इससे पूर्व तोमर की सक्रियता ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। कोलारस जाने की पूर्व संध्या पर तोमर भोपाल आये और यहां से मुख्यमंत्री के साथ यशोधराराजे सिंधिया और तोमर वहां गये। शिवराज ने चुनाव प्रभारी श्रीमती सिंधिया को घोषित कर दिया और वहां प्रचार अभियान की कमान अब उनके हाथ में है। यशोधराराजे यह कहते हुए सक्रिय हुई हैं कि यहां मुकाबला सिंधियाओं के बीच नहीं भाजपा और कांग्रेस के बीच है। कोलारस और मुंगावली उपचुनाव प्रचार में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी सक्रिय हो गए हैं और कोलारस में उन्होंने कुछ सभाओं को सम्बोधित भी किया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कोलारस में अपनी रणनीति अटेर उपचुनाव की तर्ज पर बनाई है। जहां अटेर में चुनाव प्रभारी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के विश्वस्त रहे पूर्व मंत्री डॉ. गोविंदसिंह को बनाया गया था तो वहीं कोलारस में उसी तर्ज पर दिग्विजय सिंह की सरकार में केबिनेट मंत्री रहे के.पी. सिंह कक्काजू को कांग्रेस का चुनाव प्रभारी बनाया गया है। कक्काजू दिग्विजय सिंह के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। उन्हें प्रभारी बनाने के लिए पूर्व घोषित प्रभारी सिंधिया समर्थक उज्जैन के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती को सह-प्रभारी बना दिया गया है। मुंगावली में जैसे ही सिंधिया ने चुनाव प्रचार अभियान की शुक्रवार को शुरुआत की तब उनके इस सात दिवसीय मैराथन दौरे के आगाज के अवसर पर “अबकी बार सिंधिया सरकार’’ के नारे लगाए गए। मतदाताओं के बीच यह संदेश देने की कोशिश की गयी कि यदि यह दोनों उपचुनाव कांग्रेस जीत लेती है तो अगली बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी और उसके मुख्यमंत्री सिंधिया होंगे। भले ही यह नारे लगे हों लेकिन सिंधिया ने खुद अपनी तरफ से कहा कि प्रदेश में अगली सरकार कांग्रेस की होगी और वह भी किसानों की सरकार होगी।

ज्योतिरादित्य ने चुनाव प्रचार अभियान का आगाज करते हुए कहा कि यह मात्र उपचुनाव नहीं बल्कि आगामी विधानसभा का सेमीफायनल है और इसके नतीजे शिवराज सरकार की घर-बिदाई तय करेंगे। भावान्तर भ्ाुगतान योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए भोले-भाले किसानों को ठगने का शिवराज सरकार पर सिंधिया ने आरोप भी लगाया। सिंधिया मुंगावली में कांग्रेस के प्रचार का आगाज कर रहे थे तो वहीं इसी दिन कोलारस में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने चुनाव सभाओं में इस बात को रेखांकित किया कि कांग्रेस ने कभी भी गांव, गरीब, मजदूर व किसान की चिंता नहीं की है, उसने हमेशा ही जनता को भ्रमित किया है। देश में नरेंद्र मोदी की सरकार और प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार मजदूर, किसान, गरीबों को केन्द्र में रखकर विकास को अमलीजामा पहना रही है। तोमर का कहना था कि  कोलारस में चार साल से कांग्रेस विधायक रहे हैं फिर भी उन्होंने कोई विकास का काम नहीं किया है। दोनों ही दल किसान को केंद्र बिन्दु मानकर अपने-अपने ढंग से प्रचार कर रहे हैं और किसकी बात किसानों के गले अधिक उतरी यह चुनाव परिणामों से ही पता चल सकेगा।

जहां तक कोलारस का सवाल है 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रामसिंह यादव ने भाजपा के देवेंद्र जैन को 24 हजार 953 मतों के अन्तर से पराजित किया था, बसपा प्रत्याशी चन्द्रभान सिंह यादव ने 23 हजार 920 मत प्राप्त किए थे। 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के देवेंद्र जैन ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में राम सिंह यादव को मात्र 238 मतों के अन्तर से पराजित किया था। इस चुनाव में भी बसपा के लाखन सिंह बघेल को 19 हजार 912 मत मिले थे। बसपा यह उपचुनाव नहीं लड़ रही है इसलिए कांग्रेस और भाजपा की कोशिश यह है कि बसपा के परंपरागत अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के अधिक से अधिक वोट उनकी झोलियों में आकर गिरें। यहां देवेंद्र जैन का भाजपा प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस के महेंद्र सिंह यादव से मुकाबला हो रहा है जो कि दिवंगत विधायक रामसिंह यादव के पुत्र हैं। कांग्रेस सहानुभूति लहर का फायदा उठाना चाहती है तो भाजपा सिंधिया बनाम सिंधिया का मुकाबला बनाते हुए इस सीट को कांग्रेस से छीनना चाहती है। देखने की बात यही होगी कि पिछले चुनाव के भारी अन्तर को पाटते हुए भाजपा जीत का परचम लहरा पाती है या नहीं। वैसे पिछले आंकड़े को देखते हुए इस क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ मजबूत नजर आती है जिसे कमजोर करने के लिए भाजपा एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। चुनाव नतीजे से ही पता चलेगा कि भाजपा की मेहनत यहां कितना रंग ला पाई।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक एवं भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक है।