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मानसून की सक्रियता के कारण देश में डीजल-पेट्रोल की खपत में आई कमी, जाने कैसा रहा एलपीजी का हाल

भारत में डीजल की मांग में लगातार दूसरे महीने गिरावट आई है। मानसून के चलते कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में खपत कम हो गई है, जबकि अगस्त के पहले पखवाड़े में पेट्रोल की खपत लगभग सपाट है। 1 से 15 अगस्त के दौरान डीजल की मांग 11.2 प्रतिशत गिरकर 2.82 मिलियन टन हो गई, जो पिछले वर्ष समान अवधि में 3.17 मिलियन टन थी।

घटी डीजल की खपत

हालांकि मानसून के आगमन के बाद देश में डीजल की मांग घट जाती है और इसकी खपत परंपरागत रूप से खपत अप्रैल-जून की तुलना में जुलाई-सितंबर में कम होती है। लेकिन इस साल मुद्रास्फीति के दवाब को देखते हुए डीजल की कम खपत काफी अहम मानी जा रही है। दरअसल, मानसून आने के बाद लोग लंबी दूरी की यात्राओं से भी परहेज करने लगते हैं और इसके चलते डीजल की डिमांड घटने लगती है। वहीं बारिश की वजह से कृषि क्षेत्र से उठने वाली मांग बहुत कम हो जाती है। 2021 की इसी अवधि के मुकाबले डीजल की मांग 32.8 प्रतिशत अधिक थी।

 

पेट्रोल की खपत में आई इतनी कमी

अगस्त की पहली छमाही में पेट्रोल की बिक्री 0.8 प्रतिशत बढ़कर 1.29 मिलियन टन हो गई, जबकि पिछले महीने की समान अवधि में यह 1.28 मिलियन टन थी। यह अगस्त 2021 की तुलना में 30.6 प्रतिशत अधिक और अगस्त 2020 के पहले पखवाड़े की तुलना में 43.4 प्रतिशत अधिक थी। पूर्व-कोविड स्तर की बात करें तो अगस्त 2019 की तुलना में यह 36 प्रतिशत अधिक थी।

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एटीएफ की मांग में उछाल

हवाई अड्डों पर भारत का समग्र यात्री यातायात (घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों) पूर्व कोविड 19 स्तर के करीब पहुंच गया। जेट ईंधन (एटीएफ) की मांग 1 अगस्त से 15 अगस्त तक 42.2 प्रतिशत बढ़कर 2,48,100 टन हो गई। यह अगस्त 2020 की तुलना में 121 प्रतिशत अधिक है, लेकिन अगस्त 2019 से पहले की तुलना में 18 प्रतिशत कम था।

जुलाई के मुकाबले कम हुई एलपीजी की डिमांड

अगस्त की पहली छमाही में रसोई गैस एलपीजी की बिक्री सालाना आधार पर 8.19 प्रतिशत बढ़कर 1.14 मिलियन टन हो गई। एलपीजी की खपत अगस्त 2020 की तुलना में 15.3 प्रतिशत और अगस्त 2019 की तुलना में 5.5 प्रतिशत अधिक थी। आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई की पहली छमाही के दौरान 1.24 मिलियन टन एलपीजी खपत की तुलना में मांग में 7.8 फीसदी की गिरावट आई है।