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भूपेश ने जी.एस.टी. क्षतिपूर्ति 2022 के बाद भी करने की वित्त आयोग से की मांग

रायपुर 25 जुलाई।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य को जी.एस.टी. क्षतिपूर्ति 2022 के बाद भी पांच वर्ष करने की वित्त आयोग से मांग की है।

श्री बघेल ने 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन.के.सिंह एवं सदस्यों के साथ आज यहां हुई बैठक में इसके साथ ही केन्द्रीय करो में राज्यों का हिस्सा 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की भी मांग की।उन्होंने बैठक में राज्य के विकास के लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, कार्यक्रमों और कार्यो की जानकारी दी और आयोग को छत्तीसगढ़ के विकास और यहां के नागरिकों के हित में कार्य करने की दृष्टि से अनेक प्रस्ताव दिए और आयोग से इस संबंध में सहयोग देने का आग्रह किया।

बैठक में राज्य के मानव विकास सूचकांक, पर्यावरण सरंक्षण, वामपंथी उग्रवाद, क्षेत्रीय असंतुलन, वन क्षेत्रों में विकास और यहां की चुनौतियों, समस्याओं और पर विस्तार से चर्चा की गयी और पॉवरपाइंट प्रदर्शन के माध्यम से भी जानकारी दी गयी।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 27 जिलों में से 14 जिले उग्र वामपंथ से प्रभावित है।इन क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ विकास योजनाओं एवं अधोसंरचना निर्माण की लागत अधिक होती है तथा समय सीमा में वृद्धि हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के महत्वकांक्षी कार्यक्रम ’छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी, नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी, ऐला बचाना हे संगवारी’ की जानकारी दी और बताया कि इसके तहत जहां नदी-नालों के माध्यम से जल संचयन और सवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं गोठानों के माध्यम से पशुधन के संवर्धन करने, कृषि एवं पशु कचरों एवं गोबर आदि के माध्यम से कम्पोस्ट खाद बनाने, बाड़ी के माध्यम से सब्जी एवं फल आदि पौष्टिक कृषि उत्पाद को बढ़ावा देने का प्रयास है।

उन्होने बताया कि 14वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से को बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया था, लेकिन केन्द्रीय करो पर लिए जाने वाले उपकर एवं अधिभार तथा करों पर दी जाने वाली कटौती एवं छूट के कारण अब तक सही मायने में 42 प्रतिशत राशि राज्यों को प्राप्त नहीं हो सकी है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि केन्द्रीय करों में राज्यों के हिस्से को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिजों के दोहन से पूर्व राज्य को वन क्षतिपूर्ति, भूमि व्यपवर्तन तथा अधोसंरचना निर्माण आदि पर काफी व्यय भार वहन करना पड़ता है।खनन क्षेत्र से होने वाले अपर्याप्त हिस्सा ही राज्यों को प्राप्त होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अनुपातिक हस्तांतरण में 10 प्रतिशत भार के साथ नया मापदण्ड खनन जी.एस.वी.ए.को शामिल किया जाए।

आयोग के अध्यक्ष एन.के.सिंह ने बैठक के अंत में छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों के साथ यहां की नक्सल एवं वन क्षेत्रों की विशिष्ट समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री एवं विचार-विमर्श के दौरान प्राप्त प्रस्तावों एवं सुझावों पर सहानभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

बैठक में राज्य मंत्रीगण सर्वॉ श्री ताम्रध्वज साहू, मोहम्मद अकबर, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिवकुमार डहरिया, अनिला भेड़िया, उमेश पटेल, अमरजीत भगत, राज्य शासन के मुख्य सचिव श्री सुनील कुजूर, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव वन श्री सी.के. खेतान, अपर मुख्य सचिव कृषि श्री के.डी.पी. राव सहित राज्य शासन के प्रमुख अधिकारीगण उपस्थित थे।