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भाई-बहनों के प्यार व स्नेह के पर्व रक्षाबंधन ने 50 प्रतिशत तक बढ़ाया दिल्ली के बाजारों का कारोबार, दोगुनी हुई ज्वेलरी की बिक्री

भाई-बहनों के प्यार व स्नेह के पर्व रक्षाबंधन ने दिल्ली के बाजारों को भी मुस्कराने का मौका दिया है। इस पर्व ने बाजारों की बिक्री में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। इसके साथ ही त्योहारी मौसम भी शुरू हो गया है।

पर्व के 2 दिन बाद तक गुलजार रहते हैं बाजार

जन्माष्टमी, गणोश चतुर्थी, नवरात्र और दशहरा के साथ दीपावली का पर्व भी आएगा। व्यापारियों को उम्मीद है कि बाजार यहां से उठेगा और आगे इन त्योहारों से बाजार खरीदारों से गुलजार रहेंगे। दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केटाइल एसोसिएशन, चांदनी चौक के अध्यक्ष मुकेश सचदेवा ने कहते हैं कि रक्षाबंधन पर्व के दो दिन बाद तक बाजार बहनों से गुलजार रहते हैं, क्योंकि भाइयों से मिले उपहार में पैसे से वे अपने लिए परिधान खरीदती हैं।

उनके मुताबिक रक्षाबंधन की बिक्री पूरी तरह से कोरोना मुक्त रही। हालांकि, महंगाई का थोड़ा असर देखने को मिला, इसलिए बाजार की बिक्री 50 प्रतिशत तक बढ़ी, जो और भी बढ़ सकती थी।

दिल्ली-एनसीआर में दो दिन मनाया जा रहा रक्षाबंधन

दो वर्ष बाद इस पर्व को लेकर बाजारों व कालोनियों तक में उत्साह देखने को मिल रहा है। भले ही इसके दिन को लेकर दिल्ली वाले पशोपेश में हैं। कोई इसे 11 को तो कोई एक दिन बाद 12 अगस्त को मना रहा है, लेकिन बाजार और लोगों में ऐसा उत्साह लंबे अर्से बाद देखने को मिल रहा है।

एक तो अधिकांश लोगों का टीकाकरण हो रखा है, दूसरे अब यह बीमारी उतनी घातक नहीं है। इसलिए हर ओर सकारात्मक माहौल है। इससे दुकानदारों के चेहरे खिले हुए हैं।

एक ओर भाइयों के लिए बहनें जहां अलग-अलग डिजाइन की रंग-बिरंगी राखियों की खरीदारी कर रही हैं तो बहनों को देने के लिए भाई उपहारों की खरीदारी कर रहे हैं, जिसमें सूट, साड़ी व चाकलेट समेत अन्य उपहार के सामान हैं। बंगाली मार्केट के एक प्रसिद्ध मिठाई की दुकान के मालिक लक्ष्य अग्रवाल ने कहा कि दो साल के मुकाबले इस बार बिक्री अच्छी है।

दोगुनी हुई ज्वेलरी की बिक्री

रक्षाबंधन से ज्वेलरी बाजार गुलजार है। सोने-चांदी की जहां राखियां बिक रहीं हैं तो उपहारों में सोने-चांदी के सिक्के, हार व अंगूठी समेत अन्य उपहारों की बिक्री हो रही है। सैकड़ों वर्ष पुराने ज्वेलरी बाजार दरीबा के व्यापार मंडल के महासचिव मनीष वर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुनी है। भाई-बहन अपनी जेब के अनुसार सात सौ से लेकर सात लाख रुपये तक की ज्वेलरी खरीद रहे हैं।