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छत्तीसगढ़ में खुलेगा नारियल बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय-अग्रवाल

रायपुर 02 सितम्बर।छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि राज्य में नारियल की खेती की व्यापक संभावनाओ को देखते हुए नारियल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही नारियल विकास बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय छत्तीसगढ़ में शुरू किया जाएगा।

श्री अग्रवाल आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में नारियल विकास बोर्ड, कोच्चि और छत्तीसगढ़ शासन के उद्यानिकी तथा प्रक्षेत्र वानिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित विश्व नारियल दिवस के राष्ट्रस्तरीय कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रमेश बैस ने की।

कृषि मंत्री श्री अग्रवाल ने केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के संदेश का वाचन करते हुए कहा कि देश में एक करोड़ से अधिक किसान नारियल की खेती पर आश्रित हैं और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। नारियल हमारी सांस्कृतिक विरास और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने कहा कि एशिया प्रशांत नारियल समूदाय (ए.पी.सी.सी.) के स्थापना दिवस पर प्रति वर्ष 2 सितम्बर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि देश में बीस लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नारियल की खेती होती है और लगभग 240 करोड़ नारियल का उत्पादन होता है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर, कोन्डागांव, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, धमतरी और रायपुर जिलों में नारियल की खेती की जा रही है। बस्तर में नारियल की खेती की व्यापक संभावनाएं है। नारियल विकास बोर्ड द्वारा कोन्डागांव में नारियल विकास एवं अनुसंधान परियोजना संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि बस्तर में नारियल की खेती को बढ़ावा दिया जाए तो यह नक्सलवाद को खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लगभग 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को नारियल उत्पादन के उपयुक्त पाया गया है। अभी यहां केवल 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही नारियल की खेती की जा रही है। यहां प्रति पौधे से औसतन 90 नारियल के फल प्राप्त हो रहे हैं जो कि काफी उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में नारियल के कुछ ऐसे पौधे मिले हैं जिनपर 250 से 350 फल लग रहे हैं। इनपर अनुसंधान हो रहा है जिससे आशाजनक परिणाम मिलने की उम्मीद है।