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चिल्लाने से नहीं होती हैं पत्रकारिता – रमन

रायपुर 29 जनवरी।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पत्रकारिता में चिल्लाने की बढ़ती प्रवृत्ति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शालीनता से ही पत्रकारिता होती है, चिल्लाने से नहीं।

डॉ.सिंह ने आज यहां कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के प्रशिक्षण के लिए एफ.एम. सामुदायिक रेडियो स्टेशन और टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण स्टूडियो का लोकार्पण करने के बाद लोगो को सम्बोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया का भी प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया दोनों पर अपनी खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

डा.सिंह का इस अवसर पर इस सामुदायिक रेडियो स्टेशन से साक्षात्कार भी लिया गया और इसका लाइव प्रसारण भी किया गया। यह सामुदायिक एफ.एम. रेडियो स्टेशन 90.8 फ्रिक्वेंसी पर विश्वविद्यालय के दोनों तरफ बीस-बीस किलोमीटर के दायरे में सुना जा सकेगा।

डॉ. सिंह ने कहा यह रेडियो स्टेशन विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ स्वच्छता, पर्यावरण आदि विषयों को लेकर समाज में जनजागरण का भी माध्यम बनेगा।उन्होने कहा कि इस विश्वविद्यालय में आज उपलब्ध करायी गई सुविधाएं देश के कई राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में भी नहीं है। आज इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से विद्यार्थी इन माध्यमों के तकनीकी पहलुओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास रहा है। आज से 118 वर्ष पूर्व सन् 1900 में माधव राव सप्रे पेण्ड्रा से छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकाशन प्रारंभ किया था। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया । इस विश्वविद्यालय से कुशभाऊ ठाकरे जैसी विभूति का नाम जुड़ा हुआ है।  आने वाले समय में इस विश्वविद्यालय की पहचान बनाने की जवाबदारी यहां से निकले विद्यार्थियों की है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण है। पत्रकारिता में आगे बढ़ने के काफी अवसर है। उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल और श्री मोतीलाल वोरा का इस संदर्भ में उल्लेख किया।

उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में एफ.एम. सामुदायिक रेडियो स्टेशन और टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण स्टूडियो की सुविधा उपलब्ध होने से आज विश्वविद्यालय के जुड़े जनसंचार नाम की पूर्णता हुई। अब विद्यार्थियों को जन संचार का व्यवहारिक ज्ञान यहां मिलेगा। श्री पाण्डेय ने कहा कि आज के बदलते परिवेश और सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रयोग से सूचनाओं की बाढ़ आ गई है। इन सूचनाओं की विश्वसनीयता को परखने की जिम्मेदारी पत्रकारिता से जुड़े लोगों की है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ.मानसिंह परमार ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में अब विद्यार्थियों को टेलीविजन प्रोडक्शन, एंकरिंग, इटरव्यू, डॉक्यूमेंट्री तैयार करने के तकनीकी पहलुओं का व्यवहारिक प्रशिक्षण मिल सकेगा। रेडियो संवाद के प्रारंभ होने से इस क्षेत्र का भी व्यवहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को मिलेगा।

उन्होंने कहा आने वाले समय में विश्वविद्यालय से एक दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारंभ करने की योजना है, जिससे विद्यार्थियों को प्रिंट मीडिया का भी व्यावहारिक अनुभव मिल सके। उन्होंने बताया कि भारतीय जनसंचार संस्थान विश्वविद्यालय से निकले छात्रों के प्लेसमेंट में मदद कर रहा है। इस संस्थान के साथ फेकल्टी और छात्रों के एक्सचेंज का कार्यक्रम भी भविष्य में संचालित किया जाएगा। आभार प्रदर्शन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अतुल तिवारी ने किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ.श्रीमती कीर्ति सिसोदिया ने किया।