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गुरुकुल आश्रम हमारी वैदिक संस्कृति के प्रमुख केंद्र – रमन

नुआपड़ा (ओडिशा) 25 दिसम्बर।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा है कि गुरुकुल आश्रम हमारे वैदिक ज्ञान, परम्परा और संस्कृति के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

डॉ. सिंह आज छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की  सरहद से लगे ओड़िशा के नुआपड़ा जिले के आमसेना में गुरुकुल आश्रम  के स्वर्ण जयंती समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि अमसेना गुरुकुल आश्रम ने ओड़िशा के दुर्गम क्षेत्र में वैदिक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।यह देश का प्रमुख गुरुकुल आश्रम है।मुख्यमंत्री ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती को याद करते हुए कहा कि यह गुरूकुल आश्रम उनके आदर्शो के अनुरूप संचालित हो रहा है।

डा.सिंह ने इस अवसर पर आश्रम परिसर में आयोजित 51 कुण्डीय चतुर्वेद पारायण विश्व शांति यज्ञ में शामिल हो कर सभी की सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। उन्होंने आश्रम के विकास के लिए 10 लाख रूपए मंजूर करने की घोषणा की। हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण और छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में समारोह में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी धर्मानंद सरस्वती ने 50 वर्ष पूर्व इस आश्रम की स्थापना की। उनकी तपस्या और परिश्रम से आज आश्रम वैदिक संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह गुरुकुल मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के दंडकारण्य स्थित वन गमन मार्ग में स्थित है।

समारोह में पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने आमसेना गुरुकुल की आयुर्वेदिक फार्मेसी के विकास के लिए 15 लाख रूपए और हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने हरियाणा के भिवंडी जिले के चरखी दादरी कन्या गुरुकुल के लिए 10 लाख रूपए के अनुदान की घोषणा की। स्वामी धर्मानंद सरस्वती ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डा. सिंह और हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यू ने स्वामी धर्मानंद सरस्वती का अभिनंदन किया। गुरुकुल आश्रम की अध्यक्ष माता परमेश्वरी देवी, आचार्य व्रतानंद महाराज सहित अनेक साधु संत, आश्रम के विद्यार्थी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस अवसर पर उपस्थित थे।

इस आश्रम की स्थापना वर्ष 1968 में स्वामी धर्मानंद सरस्वती ने की थी। तब यह आदिवासी बहुल क्षेत्र अकाल पीड़ित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। वर्तमान में इस आश्रम में 300 बालक और 200 बालिकाएं पढ़ रहे हैं। आश्रम द्वारा गौशाला, 60 बिस्तर के अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। आश्रम द्वारा क्षेत्र में नशामुक्ति आंदोलन भी चलाया जा रहा है। आश्रम के आचार्य व्रतानन्द सरस्वती सहित अनेक आचार्य और विद्यार्थी तथा श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे। स्वागत भाषण कप्तान रुद्रसेन ने दिया। आभार प्रदर्शन डॉ हिमांशु द्विवेदी ने किया।