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गंदगी फैलाने वालों को वंदे मातरम् के उद्घोष का अधिकार नहीं – मोदी

नई दिल्ली 11 सितम्बर।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि कस्‍बों और शहरों में गंदगी फैलाने वालों को वंदे मातरम् के उद्घोष का अधिकार नहीं है।

श्री मोदी ने आज विज्ञान भवन में छात्र सम्‍मेलन में कहा कि..मैं पूरे हिन्‍दुस्‍तान को पूछता हूं कि क्‍या हमें वंदे मातरम कहने का हक है क्‍या। वंदे मातरम बोलने का इस देश में सबसे पहला किसी को हक है तो देश भर में सफाई का काम करने वाले भारत मां के उन सच्‍चे संतानों को है,जो सफाई करते हैं। हम ये जरूर सोचे कि हम सफाई करें या न करें। गंदा करने का हक हमें नहीं है..।

उन्होने कहा कि लोगों की क्षमता और शक्ति के कारण विश्‍व मंच पर भारत का गौरव बढ़ रहा है। उन्होने कहा कि रचनात्‍मकता के बिना जीवन का कोई महत्‍व नहीं है।क्रिएटिविटी के बिना जिंदगी नहीं है। हम रोबोट नहीं बन सकते। हमारे भीतर का इंसान हर पल उजागर होते रहना चाहिए। लेकिन वो करें जिससे देश की ताकत बढ़े। देश का सामर्थ्‍य बढ़े और देश की जो आवश्‍यकता है, पूर्ति हो। जब तक हम इन चीजों से अछूत रहेंगे, हम धीरे धीरे सिमट जाएंगे। हम तो जय जगत वाले लोग है। पूरे विश्‍व को अपने भीतर समाहित करना है और हमी एक चोचले में बंद हो जाएंगे। ये कोई हम लोगों की सोच नहीं हो सकती।

प्रधानमंत्री ने कहा कि रचनात्‍मकता और नवाचार के लिए विश्‍व विद्यालय परिसर से बेहतर कोई स्‍थान नहीं है। श्री मोदी ने युवाओं के कौशल विकास पर बल दिया और उनसे एक नये भारत के निर्माण के लिए काम करने की अपील की।

उन्‍होंने कहा कि छात्र संगठनों को विश्‍वविद्यालय चुनाव के लिए प्रचार करते समय स्‍वच्‍छता पर अधिक महत्‍व देना चाहिए। यह आयोजन विश्‍व धर्म संसद में स्‍वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक और गौरवशाली शिकागो संबोधन की 125वी वर्षगांठ पर किया गया था।श्री मोदी ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद ने प्रयोग और नवाचार पर बल दिया था और उनकी सरकार उनके आदर्शों के अनुरूप काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 1893 के 11 सितम्‍बर का दिन सिर्फ भारत नहीं, बल्कि पूरे विश्‍व के लिए महत्‍वपूर्ण था, जब विवेकानंद ने प्रेम, भाईचारे और शांति का संदेश दिया था, लेकिन इस मूल संदेश को भुला देने का परिणाम ही 2001 के 11 सितम्‍बर को अमरीका में हुई त्रासदी के रूप में सामने आया।21वीं सदी के प्रारंभ का वो नाइन इलेवन जिसमें मानव जात के विनाश का मार्ग, संहार का मार्ग। उसी अमेरिका की धरती पर एक नाइन इलेवन को प्रेम और अपनत्‍व का संदेश दिया जाता है। दुनिया को समझ आया कि भारत से निकली हुई आवाज नाइन इलेवन को किस रूप में इतिहास में जगह देती है।

मेक इन इंडिया पहल का विरोध करने वालों का उल्लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि ऐसे लोगों को स्‍वाबलंबी भारत को लेकर स्‍वामी विवेकानंद की चिंताओं की ओर ध्‍यान देना चाहिए।श्री मोदी ने कहा कि जहां स्‍वामी विवेकानंद ने शिकागो भाषण में भारत और धर्म के प्रति भारतीय अवधारणा को महान बताया, वहीं उन्‍होंने देश में व्‍याप्‍त सामाजिक बुराइयों पर तीखा प्रहार भी किया था।ऐसा एक महापुरूष पल दो पल में पूरे विश्‍व को अपना बना लेता है। पूरे विश्‍व को अपने अंदर समाहित कर लेता है। हजारों साल की विकसित हुई भिन्‍न-भिन्‍न्‍ा मानव संस्‍कृति को वो अपने में समेट करके विश्‍व को अपनत्‍व की पहचान देता है। विश्‍व को जीत लेता है। वो नाइन इलेवन था। विश्‍व विजयी दिवस था वो।