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उदार हिंदुत्व के सहारे राहुल कांग्रेस की नैया पार लगा पाएंगे? – अरुण पटेल

अरूण पटेल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को भोपाल में आयोजित महाकुंभ में जीत का मंत्र दिया है कि ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत, जीत के लिए यही जड़ीबूटी।’ “केन्द्र और राज्य मिलकर लगायेंगे नई छलांग’’ नारे के साथ मोदी ने स्वयं अपने व शिवराज के लिए पांच-पांच साल का एक और कार्यकाल जनता से मांगा है। मोदी ने जो चुनौती उछाली है उसका मुकाबला जमीनी स्तर पर मतदान केंद्रों तक करना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।

मोदी और अमित शाह की हुंकार व शिवराज के वायदों की मूसलादार झड़ी के साथ ही साथ सामाजिक सरोकारों के चलते सीधे रिश्ते बनाने की महारत का कांग्रेस 2018 के विधानसभा चुनाव में कैसे मुकाबला कर पायेगी, यह देखने वाली बात होगी। खासकर ऐसे माहौल में जबकि कांग्रेस ने शिवराज के मुकाबले के लिए महागठबंधन बनाने के जो प्रयास किए थे वे अब लगभग तार-तार होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। राहुल गांधी अब शिव और राम भक्त के रूप में सामने आ रहे हैं, साथ ही उनके नाम के आगे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पं. भी लगा दिया है। राहुल गांधी के सामने लोकसभा चुनाव के पहले सबसे बड़ी चुनौती मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने की है। उदार हिंदुत्व के सहारे भक्तिभाव में रमे राहुल क्या इन राज्यों में कांग्रेस की चुनावी नैया नये परिवेश में पार लगा पायेंगे।

एक तरफ जहां भाजपा महाकुंभ के माध्यम से अपने कार्यकर्ताओं को विधानसभा व लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पूरी तरह से ऊर्जित कर चुकी है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी कार्यकर्ताओं में जीत का भरोसा जगा चुके हैं। साथ ही वे मध्यप्रदेश को ज्यादा समय भी दे रहे हैं। विंध्य क्षेत्र जिसे रेवांचल कहा जाता है उस पर कांग्रेस का इस समय अत्यधिक जोर है, क्योंकि यह वह इलाका है जहां कांग्रेस और समाजवादी काफी मजबूत रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने यहां अपने जो पैर फैलाये हैं उसमें उसके लगभग 90 प्रतिशत निर्वाचित विधायक और सांसदों की पृष्ठभूमि समाजवादियों, कांग्रेसियों और वामपंथियों की ही है। कांग्रेस गुजरात चुनाव के बाद से उदार हिंदुत्व की ओर बढ़ रही है और धीरे-धीरे इस रंग में ज्यादा रंगी नजर आने लगी है। कांग्रेस का बदला हुआ स्वरूप उसे कितना राजनीतिक फायदा दिला पाता है यह चुनाव नतीजों से ही पता चल सकेगा।

राहुल गांधी ने सतना और रीवा में रोड-शो किया और जो  जन-सैलाब उमड़ा उसने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश और उमंग पैदा कर दिया है। विंध्य की राजनीति का अपना सियासी गणित है उसे जो ज्यादा अच्छे से साध लेगा उसकी जीत की आधारभूमि तैयार हो जाएगी। वैसे 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बीच यहां बहुत बड़ा अन्तर नहीं था। कांग्रेस के पाले में 12 सीटें आईं तो भाजपा ने उससे चार अधिक 16 सीटें जीतीं। दो सीटें बसपा की झोली में गिरीं। एक विधायक नारायण त्रिपाठी बाद में भाजपा में चले गये और उसके बाद हुए उपचुनाव में यह सीट भाजपा को मिली। कांग्रेस को सबसे अधिक उम्मीद इसी क्षेत्र से है क्योंकि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह लम्बे समय से यहां सक्रिय हैं और सबको साथ लेकर राजनीतिक गोटियां बिठा रहे हैं। शिव भक्त के बाद अब राम भक्त पं. राहुल गांधी हो गये हैं। इस इलाके में यदि ठाकुर व ब्राह्मण एकजुट हो जायें तो कांग्रेस अपना खोया हुआ जनाधार आसानी से वापस पा सकती है। स्व. अर्जुन सिंह और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी इस अंचल के दो बड़े नेता रहे हैं। हालांकि दोनों कांग्रेस में विपरीत ध्रुवों पर खड़े रहते थे लेकिन अजय सिंह और सुंदरलाल तिवारी अब मिलकर राजनीति कर रहे हैं। यह मेल-मिलाप कितना गहरा है या केवल दिखावटी एकता, यह चुनाव नतीजों से ही पता चलेगा।

कांग्रेस 15 साल से सत्ता से बाहर है और वह सत्ता में वापस आने के लिए बेताब है। चित्रकूट की महिमा को यह दोहा रेखांकित करता है “चित्रकूट मा बसि रहे रहिमन अवध नरेश, जा पर विपदा परत है ते आवत एहि देश।’’ राजनीतिक तौर पर कांग्रेस भी बुरी तरह से विपदा से घिरी हुई है। लोकसभा में उसके केवल 44 सांसद ही जीते थे, हालांकि उपचुनावों में उसने अपनी कुछ संख्या बढ़ा ली, लेकिन अभी भी वह अर्धशतक से नीचे ही है। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा कामतानाथ मंदिर में पूजापाठ करना और साधु-संतों से संगत क्या कांग्रेस की प्रदेश सत्ता में वापसी करा पायेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ वचन दे चुके हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर राम-पथ का निर्माण किया जायेगा और जहां-जहां भगवान राम गये थे उन स्थानों को विकसित किया जायेगा। गांधी ने अपनी दो दिवसीय यात्रा का आगाज चित्रकूट के कामतानाथ मंदिर के दर्शन से किया। चित्रकूट राज्य के सतना जिले में स्थित है और कामदगिरि का एक भाग उत्तरप्रदेश में भी आता है। माना यह जाता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान 11 साल चित्रकूट में ही बिताए थे। यहां रामघाट भी है। चित्रकूट का उल्लेख तुलसीकृत रामायण में भी है। रामायण की यह चौपाई भी काफी प्रसिद्ध है “चित्रकूट के घाट पर भइ सन्तन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसें तिलक करें रघुवीर।’’ इस चौपाई से भी इस बात की पुष्टि होती है कि भगवान राम ने वनवास का अधिकांश समय यहीं पर व्यतीत किया।

राहुल गांधी मध्यप्रदेश में कांग्रेस का 15 साल का वनवास समाप्त कराने के प्रयासों के तहत ही कामतानाथ मंदिर गये, संतों से मुलाकात व बातचीत की। कामतानाथ के मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसके दर्शनमात्र से मनोकामना पूरी हो जाती है। राहुल की मनोकामना कांग्रेस का राजनीतिक वनवास खत्म कराने की है और यह पूरी होती है या नहीं यह देखने की बात होगी। मंदिर के महन्त गोपालदास के अनुसार गांधी ने भगवान श्रीराम और चित्रकूट के बारे में दी गयी जानकारी को पूरी गंभीरता से सुना। वैसे कांग्रेस की किसी रैली में पहली बार जय श्रीराम के नारे चित्रकूट उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पर निकाले गये जुलूस में ही लगे थे। चित्रकूट विधानसभा सीट पर कांग्रेस का विधायक था और यहां उपचुनाव में भी कांग्रेस ही जीती। चित्रकूट में स्वागत के लिए लगाये गये पोस्टर बैनरों में कांग्रेस अध्यक्ष को राम भक्त पं. राहुल गांधी लिखा गया और इसमें अन्य नेताओं के साथ विधायक नीलांशु चतुर्वेदी का चित्र भी था।

जहां तक विंध्य क्षेत्र का सवाल है सात जिलों में विधानसभा की कुल 30 सीटें हैं। रीवा व सतना जिले में ब्राह्मण वोट निर्णायक माने जाते हैं लेकिन ठाकुरों का भी दबदबा इस क्षेत्र में है। स्व. श्रीनिवास तिवारी के बेटे सुंदरलाल तिवारी पहले सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में वे कांग्रेस विधायक हैं तो वहीं दूसरी ओर स्व. अर्जुनसिंह के पुत्र अजय सिंह दूसरी बार नेता प्रतिपक्ष का पद संभाले हुए हैं। इसके पूर्व वे राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। भले ही राहुल गांधी ने पूरे प्रदेश में शिवराज के मुकाबले कमलनाथ व ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का चेहरा बना रखा हो लेकिन बुंदेलखंड व विंध्य में अजय सिंह कांग्रेस के बड़े नेता हैं और प्रदेश में भी अर्जुन सिंह के बेटे होने के कारण उनका हर जगह कुछ न कुछ प्रभाव है। अजय सिंह की सुंदरलाल तिवारी से नजदीकियां बढ़ी हैं। इस क्षेत्र में तीस सीटों में से 9 सीटों पर ब्राह्मण और आधा दर्जन सीटों पर ठाकुर विधायक हैं, इसलिए राहुल गांधी अजय सिंह को भी महत्व दे रहे हैं। यहां तीस सीटों में से यदि कांग्रेस बीस से अधिक सीटें जीत लेती है तो उसके सरकार बनाने के मंसूबों को कुछ ठोस आधार मिल जायेगा और यदि भाजपा अपने कब्जे की 16 सीटों में आधा दर्जन से अधिक सीटों का इजाफा कर लेती है तो वह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 200 प्लस के नारे को छूने के करीब पहुंच जायेगी। यही कारण है कि उदार हिंदुत्व के साथ ही राहुल गांधी के नाम के आगे पं. लिखा गया है ताकि ब्राह्मण मतदाताओं को भी कांग्रेस के पाले में लाया जा सके।

और यह भी

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कांग्रेसमुक्त भारत के नारे से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत असहमति जता चुके हैं तो वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश भाजपा एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रदेश में बूथमुक्त कांग्रेस का तीन दिवसीय अभियान 6 अक्टूबर से प्रारंभ करने वाली है। इस अभियान में सांसद, विधायक, मंत्री सहित सभी स्तर के नेता शामिल होंगे। प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य पार्टी के किसी न किसी नेता के मतदान केंद्र तक पहुंच कर मतदाताओं से संपर्क करने का है और बूथ को कांग्रेस से मुक्त कर भाजपा को जीत दिलाने का है। अब इसका जवाब तो सहस्त्रबुद्धे ही दे सकते हैं कि इसके लिए उन्होंने वह नारा क्यों चुना जिससे स्वयं संघ प्रमुख सहमत नहीं हैं, क्योंकि कोई भी विचारधारा चुनाव जीत सकती है या हार सकती है लेकिन समाज और देश उस विचारधारा से मुक्त कैसे होगा।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक एवं भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक है।