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प्रधानमंत्री सड़क योजना बनी भ्रष्टाचार का जरिया,विपक्ष का आरोप

रायपुर
28 जुलाई।छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज घटिया
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों
पर पंचायत मंत्री रामविचार नेताम के जवाब से असन्तुष्ट विपक्ष
ने दोषी लोगों को बचाने और इस योजना को भ्रष्टाचार का जरिया
बनाने का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट कर दिया।
वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य नंदकुमार पटेल ने ध्यानाकर्षण
प्रस्ताव के माध्यम से यह मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि
प्रदेश में सरगुजा रायगढ़ बिलासपुर सहित अन्य जिलों में बनाई जा
रही योजना की सड़कों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है।पिछले दो
वर्षों में बनाई गई पांच सौ सड़कों में
55
गुणवत्ताविहीन पाई गई है एवं इन सड़कों को फिर से उखाड़कर बनाने
के आदेश दिए गए हैं लेकिन इसके लिए जिम्मेदार किसी अफसर पर
कार्रवाई नहीं की गई है और उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने विभाग के अधिकारियों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार
में संलिप्त रहने का आरोप लगाया। कांग्रेस विधायक ने गड़बड़ी के
लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ एफआईआर की मांग की तो मंत्री ने
कहा कि सभी के खिलाफ जुर्म दर्ज करा देंगे तो फिर काम कौन
करेगा?विधानसभा
अध्यक्ष धरम कौशिक ने भी कहा कि उनके क्षेत्र में तो बिना
डब्ल्यूबीएम किए ही डामरीकरण कर दिया गया।
मंत्री नेताम ने कहा कि
2008-09
एवं 09-10 में कुल 1724
सड़कों का काम पूरा कराया गया।इस अवधि में राष्ट्रीय गुणवत्ता
समीक्षक ने 517 सड़कों का निरीक्षण किया,जिसमें
बस्तर की चार, बिलासपुर की छह,जांजगीर-चांपा
की तीन, जशपुर की एक,
कोरबा की तीन,
महासमुंद की दो, रायगढ़ की नौ,
रायपुर की चार तथा सरगुजा की आठ सड़कें इस तरह
कुल 40 सड़कें असंतोषप्रद पाई
गई।उन्होने माना कि पांच सड़के समीक्षक ने उखाड़ कर बनाने को
कहा है।
उन्होंने
55
सड़कों के गुणवत्ताविहीन होने की बात से इंकार करते हुए कहा कि
असंतोषप्रद सड़कों से संबंधित एक कार्यपालन अभियंता को निलंबित
किया गया है तथा तीन अधीक्षण अभियंता,चौदह
कार्यपालन अभियंता एवं दस उप अभियंताओं से अनुशासनात्मक
कार्रवाई करने हेतु स्पष्टीकरण मांगा गया है। |