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छत्तीसगढ़ में नक्सल मसले पर विपक्ष ने सरकार को कटघरे में किया खड़ा

रायपुर 27 जुलाई।छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज विपक्षी कांग्रेस
सदस्यों के नक्सल मसले पर काम रोको प्रस्ताव पर हुई
चर्चा पर मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह के जवाब के बाद सदन ने इसे
खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने लगभग सात घंटे चली बहस का उत्तर
देते हुए नक्सलियों के खिलाफ जंग को जारी ऱखने का संकल्प
दोहराया।उन्होने विपक्ष के इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए
कहा कि इस्तीफा समस्या का समाधान नही है।जनादेश काम करने का
मिला है और वह सभी के सहयोग से नक्सलियों का खात्मा करने में
कामयाब होंगे।सरकार विकास एवं सुरक्षा दोनो रणनीति पर काम कर
रही है। उन्होने कहा कि आन्ध्रमाडल की अक्सर चर्चा की जाती है
लेकिन हमें सोचना होगा कि उसने 10 वर्ष पहले लड़ाई शुरु की थी,
हम भी उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे है।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही
विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने राज्य में नक्सली समस्या के
बेकाबू हो जाने का आरोप
लगाते हुए इस बारे में दिए काम रोको प्रस्ताव पर हुई
चर्चा पर तत्काल चर्चा करवाने की मांग शुरू कर
दी।उन्होंने अपनी मांग के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी और
मुख्यमंत्री एवं गृह
मंत्री के इस्तीफे की मांग के पोस्टर भी लहराया।
अध्यक्ष धरम कौशिक ने उन्हें शान्त
करने तथा प्रश्नकाल को काफी अहम बताते हुए इसे चलने देने का
अनुरोध किया।लेकिन उनके
कथन का जब विपक्षी सदस्यों पर कोई असर नहीं पडा तो उन्होंने
सदन की कार्यवाही पांच
मिनट के लिए स्थगित कर दी।सदन की कार्यवाही जब फिर शुरू हुई तो
अध्यक्ष ने प्रश्न पूछने के लिए सदस्यों का
नाम पुकारना शुरू किया लेकिन कांग्रेस सदस्यों ने फिर नारेबाजी
शुरू कर दी।
कांग्रेस सदस्य अपनी मांग पर अडे
रहे तो उन्होंने प्रश्नकाल तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित
कर दी।
सदन की कार्यवाही जब फिर शुरू हुई तो गृह मंत्री ननकीराम
कंवर ने कांग्रेस सदस्य
नन्द कुमार पटेल एवं अन्य की स्थगन सूचना पर दिए व्यक्तव्य में
राज्य में नक्सलियों के अपने प्रभाव क्षेत्र में
विस्तार करने के विपक्षी सदस्यों के दावों को निराधार बताते
हुए दावा किया कि
सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई से बचाव की मुद्रा में आए
नक्सलियों को उत्तर
राज्य कमेटी को भंग करना पडा है।
गृह मंत्री श्री कंवर ने कहा कि स्वयं नक्सलियों ने भी अपने
दस्तावेजों में माना है कि सुरक्षा बलों की
संयुक्त कार्रवाई में उन्हे छत्तीसगढ में सर्वाधिक नुकसान
उठाना पडा है।उन्होंने
राज्य में नक्सली हमले बढने. सरकार की नक्सली रणनीति विफल होने
तथा इससे सुरक्षा
बलों के मनोबल पर बुरा प्रभाव पडने को भी गलत बताया।
उन्होंने कहा कि लगातार
सफलताएं मिलने से सुरक्षा बलों का मनोबल काफी बढा हुआ है जिसके
फलस्वरूप सरगुजा
क्षेत्र नक्सली पडोसी राज्य झारखंड को पलायन कर गए है जिसके
कारण नक्सलियों को
उत्तर छत्तीसगढ राज्य कमेटी को भंग करना पडा है।उन्होंने पिछले
तीन वर्षो में आकडे
देते हुए कहा कि इस दौरान नक्सली हमलों में कमी दर्ज की गयी
है।
गृह मंत्री श्री कंवर ने कहा कि केन्द्रीय सुरक्षा
बलों.राज्य पुलिस बल का पूरा
उपयोग कर नक्सलियों केखिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और
राज्य सरकार नक्सली
समस्या के उन्मूलन के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है।सरकार विकास
एवं सुरक्षा का एक
साथ तानाबाना बुनकर कार्रवाई कर रही है।मंत्री के व्यक्तव्य के
बाद अध्यक्ष
धरम कौशिक ने इसकी ग्राह्यता पर सत्ता पक्ष की राय
मांगी।मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह
के इसे ग्राह्य करने की सहमति देने के बाद स्थगन को मंजूर कर
लिया गया और चर्चा
शुरू हो गयी।वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य नन्द कुमार पटेल ने चर्चा
शुरू करते हुए
कहा कि एक तरफ गृह मंत्री सदन में नक्सलियों के नियंत्रण
क्षेत्र बढने से इंकार कर
रहे है तो दूसरी ओर स्वयं मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने पिछले
हफ्ते ही राष्ट्रीय
विकास परिषद की बैठक में नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र
13
जिलों में होने का बयान
दिया था।उन्होंने नियंत्रण क्षेत्र नही बढने को हास्यापद करार
दिया।
भाजपा
के दीपक कुमार पटेल ने कहा कि राज्य में नक्सली
समस्या पर काबू पाने के लिए लडाई रमन सरकार के पदारूढ होने के
बाद शुरू
हुई।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय गृह मंत्री भी
इस समस्या की
गंभीरता को अब मानने लगे है और वह राज्य को सहयोग भी करना
चाहते है लेकिन कांग्रेस
के लोग ही इसमें रोडे अटका रहे है।
श्री पटेल ने केन्द्रीय
गृह राज्यमंत्री अजय माकन के एक व्यक्तव्य का उल्लेख करते हुए
कहा कि उनकी
यह स्वीकरोक्ति सच है कि नक्सलियों के खिलाफ15..20
वर्षो पहले कार्रवाई शुरू होनी
थी।उन्होंने
राज्य सरकार द्वारा समस्या के उन्मूलन के लिए उठाए जा रहे
विभिन्न कदमों का जिक्र किया और कहा कि सरकार के सतत प्रयासों
से ही सरगुजा इलाके
से नक्सलियों को पलायन करना पड़ा है।कांग्रेस के धर्मजीत सिंह
ने राज्य
में नक्सलियों का प्रभाव तेजी से बढने का आरोप लगातें हुए कहा
कि कल ही दोरनापाल
थाने को लूटने का उनके द्वारा असफल प्रयास किया गया।उन्होंने
कहा कि राज्य गठन के
समय राज्य को केन्द्र ने महज नौ बटालियन अर्द्ध सुरक्षा बलों
की मुहैया करवायी थी
लेकिन आज
50
बटालियन अर्द्ध सुरक्षा बलों के साथ ही पर्याप्त संसाधन
केन्द्र ने
मुहैया करवाया है लेकिन फिर भी नक्सली बेकाबू है।
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