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नया रायपुर में
हरित क्षेत्र के साथ ऑक्सी-जोन भी होगा

रायपुर 17
जुलाई।छत्तीसगढ़ की आठ हजार हेक्टेयर से कुछ अधिक रकबे में तेजी
से विकसित हो रही नई राजधानी में 26.67
प्रतिशत का रकबा
हरित क्षेत्र के रूप में होगा,
वहीं
निर्माणाधीन कैपिटल कॉम्पलेक्स के पीछे 80
हेक्टयेर के रकबे
में बरगद,
पीपल, नीम
और
करंज जैसे अधिक
मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करने वाले पौधे लगाकर ऑक्सी-जोन
भी
बनाया जाएगा।
कार्ययोजना
के तहत 'नया
रायपुर'
के आठ हजार 013
हेक्टेयर
के
सम्पूर्ण रकबे में से 26.67
प्रतिशत के रकबे
को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित
करने का
सिलसिला आज से शुरू हो गया,
जहां राज्यपाल
शेखर दत्त,
मुख्यमंत्री डॉ.
रमन सिंह
और विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक सहित प्रदेश सरकार के अनेक
मत्रियों,
स्थानीय
जनप्रतिनिधियों,
शासकीय
अधिकारियों और कर्मचारियों,
स्कूल
कॉलेजों
के विद्यार्थियों और आम नागरिकों तथा ग्रामीणों ने बड़ी संख्या
में उपस्थित
होकर सघन
वृक्षारोपण किया। बरगद,
पीपल,
नीम,
करंज,
आम,
जामुन,
अमलतास आदि
विभिन्न
प्रजातियों के एक
लाख पौधे लगाए गए। दरअसल बरगद,
पीपल,
करंज और नीम जैसे
वृक्ष अधिक
मात्रा में
ऑक्सीजन देते हैं। ये मनुष्य और प्राणी-जगत की सेहत और स्थानीय
पर्यावरण
के लिए भी
लाभदायक होगा।
नया रायपुर
में बन रहे कैपिटल कॉम्पलेक्स के
पीछे लगभग
80
हेक्टेयर में ऑक्सी-जोन के रूप में एक विशाल हरित क्षेत्र
विकसित किया
जा रहा है,
जो इस कॉम्पलेक्स
के पीछे एक ऐसे प्राकृतिक रंग और वातावरण का निर्माण
करेगा,
जिसे सामने की
दिशा में कैपिटल कॉम्पलेक्स को देखने पर किसी का भी मन उस
दृश्य को
कैमरे में कैद करने के लिए मचल उठेगा। नया रायपुर के सम्पूर्ण
आठ हजार 013
हेक्टेयर के रकबे
में से चारों तरफ पांच सौ मीटर की चौड़ाई में एक हजार
509 हेक्टेयर
की हरित
पट्टी विकसित की जा रही है।
नये रायपुर
की यह विकास परियोजना वर्ष 2031
तक
अनुमानित
पांच लाख 60
हजार की जनसंख्या
को ध्यान में रखकर बनायी गयी है। इस रकबे
में
26.67
प्रतिशत हरित क्षेत्र, 26.37
प्रतिशत आवासीय
भूमि, 23.04
प्रतिशत
सार्वजनिक-अर्ध्दसार्वजनिक कार्य के लिए और 12.55
प्रतिशत रकबा
यातायात सुविधाओं के
लिए होगा। शेष
11.37
प्रतिशत भूमि व्यावसायिक,
औद्योगिक और
मिश्रित तथा अन्य
प्रयोजन के लिए
रहेगी।
उन्होंने
बताया कि नया रायपुर
में प्रत्येक
मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर 150
मीटर की लम्बाई
और तीस मीटर की
चौड़ाई में
वृक्षारोपण की दस अलग-अलग आदर्श कार्य योजना भी तैयार की गयी
है। इसके
अन्तर्गत
वृक्षारोपण इस प्रकार किया जाएगा कि प्रत्येक 150
मीटर पर दृश्य
बदलने के
कारण वाहन चालक
हमेशा सतर्क रहेंगे। कठोर लकड़ी वाले वृक्षों को अंतिम छोर पर
लगाया
जाएगा। झाड़ी और
कोमल काष्ठ वाली प्रजातियों के वृक्षों को सड़कों के किनारे
लगाया
जाएगा,
ताकि संभावित
दुर्घटनाओं के समय वाहन चालक और अन्य लोगों को नुकसान न्यूनतम
हो।
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