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छत्तीसगढ़ समाचार
07/14/2010

04:21:50

हिंसा छोड़े बगैर नक्सलियों से बातचीत के प्रयासों का रमन ने किया विरोध

रायपुर..नई दिल्ली 14 जुलाई।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.  रमन सिंह ने आज फिर कहा है कि जब तक नक्सलवादी बन्दूक छोड़ कर भारतीय संविधान पर आस्था नहीं जताते और लोकतांत्रिक तौर-तरीकों को नहीं अपनाते, तब तक उनसे बातचीत का कोई मतलब नही है।

  डॉ.सिंह ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित  देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की विशेष बैठक में कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए नक्सलियों से आर-पार की लड़ाई अनिवार्य हो गयी है।डॉ.सिंह ने बैठक में राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के दो नये जिलों बीजापुर और नारायणपुर तथा तीन नये पुलिस जिलों बलरामपुर, सूरजपुर और गरियाबंद के लिए प्रत्येक जिले के हिसाब से दो सौ करोड़ रूपए के विशेष पैकेज की भी मांग रखी।

     मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवादियों, उनके सहयोगियों और हमदर्दों की कथनी और करनी को जनता के समाने लाने का जो सिलसिला छत्तीसगढ़ में छह साल पहले शुरू हुआ था, उसके कारण अब नक्सलियों का मुखौटा पूरी तरह उतर चुका है।उन्होने नक्सलियों और उनके हमदर्द कुछ बुद्धिजीवियों के इस दुष्प्रचार का जोरदार शब्दों में खण्डन किया कि बस्तर में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और निजी उद्योगपतियों को मूल्यवान खनिजों से भरी जमीनें दी जाती है। डॉ. रमन सिंह ने बैठक में कहा कि वस्तु स्थिति यह है कि पिछले 50 साल में कोई भी बहुराष्ट्रीय कम्पनी एक किलो लौह अयस्क भी नहीं ले गयी है। लगभग 40 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले बस्तर अंचल में सिर्फ एक प्रतिशत जमीन खनिजों के उत्खनन और प्राॅसपेक्टिंग के लिए दी गयी है, वह भी सिर्फ राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, भारतीय इस्पात प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल समस्या से निबटने के लिए छत्तीसगढ़ के साथ पूरे देश को बहुआयामी और बहुस्तरीय प्रयासों के लिए एकजुट होने की जरूरत है। यह एक बहुत बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी हम सबके सामने है। मुख्यमंत्री ने नक्सल समस्या के बारे में छत्तीसगढ़ सरकार के नजरिए को स्पष्ट करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ एक नया राज्य है, जिसके संसाधनों की अपनी सीमा है। एक ओर नक्सलियों ने अपनी सारी ताकत छत्तीसगढ़ में झोंक रखी है, वहीं दूसरी ओर हमारा नया राज्य नक्सलवाद के खिलाफ आज सबसे बड़ी लड़ाई लड रहा है।

  मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और निर्माण कार्यों के लिए विषम परिस्थितियों में भी काम करने में सक्षम सीमा सड़क संगठन (बी.आर.ओ.) की जरूरत हमें अभी भी है। हम चाहेंगे कि जब तक इस क्षेत्र में सड़क निर्माण का लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक बी.आर.ओ. की सेवाएं हमें मिलती रहे। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति बनायी है। डॉ.सिंह ने कहा कि राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में अधोसंरचना विकास के कार्यों में तेजी आयी है, प्रशासन को आम जनता के और भी ज्यादा नजदीक लाने के लिए दो नए राजस्व जिलों नारायणपुर और बीजापुर का गठन किया गया है, वहीं तीन नए पुलिस जिले- बलरामपुर, सूरजपुर और गरियाबंद भी गठित किए गए हैं।

   उन्होने कहा कि नक्सली ताकतों में अब बहुत इजाफा हो चुका है।बस्तर में नक्सलियों की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में कुल 7 डिवीजन, 32 एरिया कमेटी हैं, जिसके तहत करीब 50,000 नक्सली एवं जनमिलिशिया, प्रजातंत्र के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए हैं। देश की 40 प्रतिशत से ज्यादा मुठभेड़ बस्तर में हुई है। नक्सली बस्तर को आधार क्षेत्र बनाना चाह रहे हैं।वहाँ पर नक्सलियों की बटालियन बन चुकी है और अब वे अपने ब्रिग्रेड भी बनाने की तैयारी में है।दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हमने पुलिस का बजट 268 करोड़ से बढ़ाकर 1019 करोड़ रूपये कर दिया। पिछले छह सालों में पुलिस बल 22000 से बढ़ाकर 49000 कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार हर साल तीन-चार हजार लोगों की भर्ती पुलिस बलों में कर रही है। विगत वर्ष 6700 लोगों की भर्ती की गई थी और इस वर्ष फिर 4000 जवानों की भर्ती की जा रही है।

    डॉ.सिंह ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही और उसकी प्रतिक्रिया के तौर पर हालांकि छत्तीसगढ़ में कुछ बड़ी घटनाएं हुई हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में वर्ष 2009 में 119 नक्सली मारे गए हैं, यह संख्या देश में सर्वाधिक है। साथ ही पकड़े और मारे गये नक्सलियों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। यह सब केन्द्रीय एवं राज्य सुरक्षा बलों के अथक परिश्रम एवं बलिदान से ही संभव हुआ है। कुछ मानव अधिकारवादियों, छद्म प्रबुद्ध वर्ग के प्रोपोगेण्डा का सहारा नक्सलियों द्वारा लिया जा रहा है। इस मोर्चे पर भी कारगर जवाबी कार्यवाही करते हुए हमें जनता को सच्चाई बताना होगा।

 

 

 

 


।। हम हिंदी से है, हिंदी हमसे है ।।


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