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नसीहत के ‘दीपक’ से रोशन होगा कांग्रेसी कुनबा – अरुण पटेल

अरूण पटेल

पन्द्रह साल के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अपेक्षा और उम्मीद यह थी कि जब पार्टी सत्ता में आई है तो पुरानी कार्य-संस्कृति और शासन-प्रशासन के उस रवैये में बदलाव का अहसास होगा जिसका दंश वे डेढ़ दशक से भुगत रहे थे। कार्यकर्ताओं की पीड़ा बेबसी और मनोभावों को पूरी शिद्दत से समझते हुए प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने अभिव्यक्ति दी है। उनकी नसीहत और चेतावनी में इस आश्‍वस्ति का भाव है कि अब आने वाले समय में निचले स्तर तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बदलाव का अहसास होगा। कांग्रेेसजन यह महसूस कर रहे थे कि अभी भी शासन-प्रशासन के तौर तरीकों में भाजपाई संस्कृति पूरी तरह से हावी है और उनकी अपेक्षा यह थी कि इससे अब मुक्ति मिलेगी। उन्होंने मंत्रियों को दो-टूक शब्दों में समझाइश दी कि अगर किसी मंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं को उपकृत किया तो वे उसे सोनिया गांधी के सामने खड़ा कर देंगे और मंत्रिमंडल विस्तार में उसका मंत्री पद छिन सकता है। इस प्रकार उन्होंने सीधे-सीधे समझा दिया कि मंत्री सुधर जायें, अपने व्यवहार व कार्य-संस्कृति में बदलाव लायें अन्यथा उन्हें पद से हटाया जायेगा। कांग्रेस के वरिष्ठतम नेता एवं केंद्रीय फलक पर अपनी धाक जमा चुके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी कार्यकर्ताओं के मनोभावों को समझने में एक क्षण की देरी नहीं लगी और उन्होंने कहा कि भाजपा ने पन्द्रह साल के अपने कार्यकाल में सरकार का भगवाकरण कर दिया था, इस बीच जो आईएएस एवं आईपीएस अधिकारी सेवा में आये उन्हें कांग्रेस की कार्यशैली पता नहीं है। उनके इस कथन का यह मतलब है कि वे भी कांग्रेसजनों को यह भरोसा दिला रहे थे कि वे बदलाव के जिस वाहक के रुप में सामने आये हैं उसका अहसास कांग्रेसजनों के साथ आमजनों को अवश्य ही करायेंगे।

कमलनाथ शासन और प्रशासन की बारीकियों से बखूबी परिचित हैं इसलिए कांगेेसजनों को यह भरोसा दिलाने में सफल होंगे कि वे कर्मचारियों और अधिकारियों को कांग्रेसी शैली व कार्य-संस्कृति से पारंगत करेंगे ताकि जिस प्रकार की उनकी मंशा है वह धरातल पर उतर सके। राजधानी के मानस भवन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों, प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधियों, मंत्रियों, विधायकों, जिला व शहर कांग्रेस अध्यक्षों, लोकसभा व विधानसभा चुनाव हारे प्रत्याशियों सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में मुख्यमंत्रीकमलनाथ ने दो-टूक शब्दों में कहा कि पन्द्रह साल में भाजपा सरकार ने कृषि क्षेत्र को चौपट कर दिया था, नौजवानों के रोजगार की व्यवस्था नहीं की और अर्थव्यवस्था को गिरा दिया। इन चुनौतियों के बीच बीस लाख किसानों का कर्ज माफ किया गया। इस प्रक्रिया में समय लगा, रोजगार देने के लिए निवेश लाने की जरुरत थी, इन परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे पाया, जबकि मुझे कांग्रेस परिवार के हर सदस्य ने यह जिम्मेदारी दी, अकेले विधायकों ने मुझे मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी नहीं दी है। इस प्रकार उन्होंने आम जमीनी कार्यकर्ता से लेकर बड़े कांग्रेस नेताओं तक को यह अहसास दिलाया कि अब उनकी भी पूछपरख होगी।

बाबरिया ने नसीहत देते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के सामने मंत्रियों की पेशी कराने की बात इस मकसद से की कि वे जो अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं उसे सभी मंत्री पूरी गंभीरता से लें और उस पर अमल करें। वैसे पिछले डेड़ दशक के भाजपा शासनकाल में जब भी भाजपा की संगठनात्मक बैठक होती थी उन सबमें भी उपदेश के घुट्टी पिलाने के साथ ही मंत्रियों से यह कहा जाता था कि वे कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करें, संपर्क बढ़ायें, उन्हें महत्व दें, लेकिन उस समय भी यह देखने में आया था कि अनेक मंत्री ऐसे थे जो एक कान से सुनकर दूसरे कान से बात को बाहर निकाल देते थे। आने वाले समय में देखने वाली बात यही होगी कि कमलनाथ सरकार के मंत्रियों के कार्य-व्यवहार में बाबरिया की सीख का कितना असर पड़ा। बाबरिया ने इस बात को कहने से परहेज नहीं किया कि उनके पास एक मंत्री की शिकायत आई थी जिसमें बताया गया था कि भाजपा कार्यकर्ता को उन्होंने नियुक्ति दी है। जब उन्होंने उस मंत्री से इस बारे में सवाल किया तो मंत्री ने जवाब दिया कि जिला कांग्रेस कमेटी की अनुशंसा पर ऐसा किया गया है, लेकिन जब उनसे अनुशंसा का पत्र मांगा गया तो वे उसे उपलब्ध नहीं करा पाये। उस मंत्री की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि जिला कांग्रेस कमेटी का अनुशंसा पत्र उपलब्ध नहीं करा पाये तो फिर उन्हें सोनिया के सामने पेश कर देंगे। बाबरिया ने यह भी कहा कि मंत्रियों को राजनीतिक समझ नहीं होने से भाजपा कार्यकर्ताओं को उपकृत किया जा रहा है या फिर मंत्री जानबूझ कर रहे हैं या किसी और वजह से ऐसा कर रहे हैं। ऐसे सभी मंत्रियों को उन्होंने सतर्क हो जाने की चेतावनी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी आग्रह किया कि वे मंत्रियों को निर्देशित करें कि  पार्टी कार्यकर्ताओं से वे संवाद बनाकर रखें। नेताओं को बाबरिया ने नसीहत दी कि वे अनुशासन में रहें। इस मामले में बड़ा या छोटा नेता कोई बख्शा नहीं जायेगा, इसलिए बयानबाजी या साक्षात्कार देते समय गंभीर और सतर्क रहें। कांग्रेसजनों की यह स्थायी शिकायत रहती है कि अधिकांश पद नेताओं की गणेश परिक्रमा करने वाले लोगों को मिल जाते हैं और मैदानी कार्यकर्ता हमेशा हाथ मलते रह जाता है। बाबरिया ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि वे सभी विधानसभा क्षेत्रों के दस-दस लोगों को कुछ न कुछ पद व जिम्मेदारियां सौंपे तब ही मैदानी कार्यकर्ताओं में जोश भरकर उनकी ऊर्जा का पार्टी के लिए उपयोग हो सकेगा। यह बात उन्होंने निगम-मंडलों और अन्य विभिन्न स्तरों पर बनने वाली शासकीय समितियों में नियुक्ति के संदर्भ में कही।

और यह भी

भारत निर्वाचन आयोग ने झाबुआ विधानसभा उपचुनाव की तारीखें घोषित कर दी हैं। 21 अक्टूबर को मतदान एवं 24 अक्टूबर को मतगणना होगी। वैसे तो यह विधानसभा का एक उपचुनाव मात्र है लेकिन इसके चुनाव नतीजे का असर प्रदेश की राजनीति पर गहरे तक पड़ने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए यह चुनाव जीतना इसलिए नितान्त जरुरी है ताकि इस बात पर मतदाताओं की मोहर लग सके कि नौ माह के उनके कार्यकाल से जनता संतुष्ट है। इसके साथ ही कांग्रेस का अपना भी बहुमत हो जायेगा और सरकार में अधिक स्थिरता पैदा होगी। भाजपा नेता समय-समय पर जो अस्थिरता का माहौल पैदा करते हैं उससे भी कुछ समय के लिए सरकार को राहत मिल जायेगी। भाजपा के लिए भी यह सीट बरकरार रखना इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसके कब्जे की सीट थी।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक एवं अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक है।

 

 

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