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पीरियड्स से जुड़ी बीमारियों से महिलाओं को सजग रहने जरूरी

पीरियड्स से जुड़ी कई बीमारियों से महिलाएं या तो अंजान होती है या फिर उसकी गंभीरता को नही समझती है। हर महीने दर्द और कमज़ोरी से जूझती हैं औरतें पीरियड्स से जुड़े कई किस्से हर औरत की ज़िंदगी में होते हैं। सबकी अपनी परेशानियां होती हैं किसी को पीरियड्स के पहले दर्द परेशान करता है कोई उसके बाद जूझता है कई बार औरतें बीमारियों से भी जूझ रही होती हैं लेकिन उन्हें पता ही नहीं चलता।
आमतौर पर हम पीरियड्स के बारे में बात नहीं करते औरतें इससे जुड़ी हर परेशानी छिपा ले जाती हैं बड़े शहरों में और डिजिटल युग में बढ़ती जागरूकता के साथ लड़कियां इसके बारे में बात करने लगी हैं, पर छोटे शहरों और गांवों में औरतें आज भी इसपर बात नहीं करतीं।

मेनेरेजिया

डॉक्टरों का कहना है कि कई औरतों को ‘मेनेरेजिया’ नाम की बीमारी होती है जिसकी जानकारी उन्हें खुद नहीं होती. मेनेरेजिया यानी पीरियड्स के दौरान ख़ून का बहुत ज़्यादा फ्लो. इसकी कई वजहें हो सकती हैं।

पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम

हार्मोन्स के असंतुलन,मोटापा,थॉयराइड की समस्या,गर्भाशय में फाइब्रॉयड (गांठें) हो जाना कई बार यूट्रस की  झिल्ली पर असामान्य रूप से टिशू पैदा हो जाते हैं।

सर्वाइकल कैंसर का ख़तरा

गर्भाशय और सर्वाइकल कैंसर अधिकतर महिलाओं में मीनोपॉज़, यानी पीरियड बंद होने के बाद होता है।साथ ही हार्मोनल दवाइयों और गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन से भी कैंसर का खतरा होता है इससे भी पीरियड्स में ज़्यादा ब्लीडिंग होती हैं कई बार ख़ून को क्लॉट करने वाले प्रोटीन का स्तर कम होने से भी बीमारी हो जाती है। इस बीमारी से जूझ रही अधिकतर महिलाओं को अपनी बीमारी का पता ही नहीं चल पाता इस बीमारी की वजह से महिलाओं को सात दिन से भी ज़्यादा ब्लीडिंग होती है इतनी ब्लीडिंग कि हर घंटे पैड बदलना पड़ता है।
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस गाइनोकॉलजी विभाग की डायरेक्टर का कहना है कि इस तरह की अनुवांशिक दिक्कतें पहले पीरियड से ही दिखने लगती हैं।

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