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मोदी की सुनामी में विपक्षी पार्टियों का लगभग सूपड़ा साफ

नयी दिल्ली 23 मई।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतत्व में आई राजनीतिक सुनामी में विपक्षी दलो का लगभग सूपड़ा साफ हो गया है।भाजपा आजादी के बाद लगातार दूसरी बार केन्द्र में सत्ता में पूर्ण बहुमत में आने वाली पहली गैर कांग्रेस सरकार बन गई है।

भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 300 से अधिक सीटें हासिल कर एक बार फिर इतिहास रच दिया और देश के पश्चिम तथा उत्तरी भाग में ही नहीं बल्कि पूर्वी हिस्से में भी विरोधियों के पैर उखाड़ कर परचम लहरा दिया।‘मोदी सुनामी’ के चलते दक्षिण के तीन राज्यों को छोड़कर पूरा देश मोदीमय हो गया।

कांग्रेस करीब एक दर्जन राज्यों में अपना खाता भी नहीं खोल पायी हैं। उसे 52 सीटें मिल रही हैं और इस बार भी उसे लोकसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा मिलना मुश्किल है।उसके नौ पूर्व मुख्यमंत्री और कई अन्य दिग्गज नेता चुनाव हार गये। यहां तक कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को भी एक सीट अमेठी पर हार का स्वाद चखना पड़ा यद्धपि वह केरल की वायनाड सीट से जीत रहे हैं। केरल और पंजाब ने कुछ हद तक कांग्रेस की लाज बचा ली है नहीं तो उसका प्रदर्शन पिछली बार से भी नीचे जा सकता था।

श्री मोदी के करिश्मे के बल पर भाजपा को पहली बार 303 सीटें मिल रही हैं और वर्ष 1971 के बाद यह दूसरा मौका होगा जब किसी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उनकी पार्टी की लगातार दूसरी बार बहुमत की सरकार बनेगी। श्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी के नेतृत्व में भाजपा ने जो बुलंदी हासिल की है उसके सामने अटल-आडवाणी की उपलब्धि भी धूमिल हो गयी।

भाजपा ने पश्चिम और उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में लगातार दूसरी बार अपना एकक्षत्र वर्चस्व कायम किया, वहीं बिहार और महाराष्ट्र में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर विरोधियों का पूरी तरह सफाया कर दिया।

श्री मोदी ने वाराणसी और श्री शाह ने गांधीनगर सीट पर भारी मतों से जीत हासिल की है। पार्टी के सभी दिग्गज नेता भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। इस चुनाव में प्रचंड जीत के बावजूद भाजपा तमिलनाडु , आन्ध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में खाता नहीं खोल पायी।

भाजपा पश्चिम बंगाल में सुश्री ममता बनर्जी के किले को तोड़कर 18 सीटों पर जीत रही है जबकि पिछली बार उसे सिर्फ दो सीटें मिली थी। राज्य में तृणमूल कांग्रेस  को 22 सीटें मिल रही हैं और शेष दो सीटें कांग्रेस के खाते में जा रही हैं। वाम दलों का वहां सूपड़ा साफ हो गया है।  ओडिशा में भी भाजपा नम्बर दो पार्टी बनकर उभरी है। उसे 21 सीटों में से  8 सीटें मिल रही हैं जबकि राज्य में सत्तारूढ बीजू जनता दल को 12 सीटों पर और कांग्रेस को एक सीट पर सफलता मिल रही हैं।

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को भी धत्ता बताकर भाजपा 62 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है जबकि दो सीटें उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को मिल रही हैं। गत दिसम्बर में कांग्रेस के हाथों तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ को गंवाने वाली भाजपा ने इस चुनाव में उसे करारा जवाब दिया है और इन राज्यों की लगभग सभी सीटों पर जीत हासिल की है।मध्य प्रदेश में भाजपा 29 में से 28 सीटें जीत रही हैं और कांग्रेस को सिर्फ एक सीट पर संतोष करना पड़ रहा है। राजस्थान में कांग्रेस का इस बार भी खाता नहीं खुल पाया है और श्री गहलोत के पुत्र को भी हार का सामना करना पड़ा है। राज्य में भाजपा को 25 में से 24 सीटें मिली हैं जबकि एक सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के खाते में गयी है।

बिहार में भी भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ शानदार प्रदर्शन किया है। उसके गठबंधन को 40 में से 39 सीटें मिल रही हैं जिनमें भाजपा की 17, जद यू की 16 तथा लोकजनशक्ति पार्टी की 6 सीटें शामिल हैं। महागठबंधन का राज्य में सफाया हो गया है और इसमें शामिल केवल कांग्रेस को ही एक सीट मिल रही है। राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया है।

 

 

 

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