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घोषणा पत्र : जुमले, वादे या मतदाता करे भरोसा? – अरुण पटेल

अरूण पटेल

हम निभाएंगे वायदे के साथ जहां कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी जीत का मार्ग प्रशस्त करने की कोशिश कर रही है तो वहीं पुराने वायदों और नए संकल्पों के सहारे भारतीय जनता पार्टी इस जुगत में है कि एक बार और नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बड़े बहुमत के साथ एक मजबूत सरकार बना सके। समाजवादी पार्टी ने भी अपने चुनाव घोषणापत्र में महागठबंधन के तरफ से बड़े बदलाव, सामाजिक न्याय और लोगों के जीवन में खुशहाली लाने का इंद्रधनुषी सप्तरंगी सपनों का संसार राजनीतिक फलक पर फैलाकर बड़ी जीत का सपना संजोया है। मतदाता किस के वायदों, किसके इरादों व किसकी नीयत पर भरोसा करते हैं यह 23 मई को मतगणना के बाद ही पता चल सकेगा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने घोषणापत्र में ‘सामाजिक न्याय से महापरिवर्तन एक नई दिशा एक नई उम्मीद‘ की थीम पर मतदाताओं के बीच महागठबंधन के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की है। घोषणापत्र पर डॉ. राममनोहर लोहिया का विचार ‘गरीबी के खिलाफ लड़ाई एक धोखा है जब तक जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव के खिलाफ लड़ाई ना हो’ को छापा गया है। यह किसी से छिपा नहीं है कि भले ही बात लोहियाजी से प्रारंभ की गई हो लेकिन समाजवादी पार्टी पारिवारिक और जातिवादी राजनीति में गहरे तक धंसी हुई है, कितनी मजेदार बात है कि वह मतदाताओं से इसके खिलाफ ही लड़ने का वायदा कर रही है।

कांग्रेस ने 22 लाख सरकारी नौकरियों के खाली स्थान भरने एवं गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को साल के 72 हजार रुपए देने सहित किसानों के लिए अलग से बजट बनाने के साथ ही इस बात पर जोर दिया है कि काम, दाम, शान, सुशासन, स्वाभिमान और सम्मान की मूल भावना के साथ गरीबी पर सर्जिकल स्ट्राइक करेगी। गांव, गरीब, किसान व रोजगार के मुद्दों पर इसका खास फोकस रहेगा। भारतीय जनता पार्टी ने केवल नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे करते हुए पुराने वायदों के साथ कुछ नए संकल्प दोहराए हैं और इसके सहारे अपने पुराने तमाम मुद्दों के साथ ही फिर से राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और धारा 35-ए हटाने, समान नागरिक संहिता लागू करने, किसानों की आय दुगुनी करने और स्किल डेवलपमेंट जैसे वादों को दोहराते हुए आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार और राष्ट्रवाद के मुद्दे के सहारे मतदाताओं के सामने फिर से एक नया सपना दिखा दिया है। चुनाव के समय घोषणाओं और वायदों की ऐसी झड़ी लगी रहती है कि आसमान से चांद-सितारे तोड़कर लाने को छोड़ कर हर तरह की लोकलुभावन लम्बी-चौड़ी बातें करने से कोई राजनीतिक दल परहेज नहीं करता है।

राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस और मोदी के चेहरे वाली भाजपा के चुनावी वायदों में जनता से क्या-क्या कहा गया है इसकी कुछ चुनिंदा बातों पर नजर डालना लाजिमी होगा क्योंकि इनके आधार पर ही मतदाता भी एक बड़ी सीमा तक अपना मानस बनाते हैं। गांव और किसानों के मामले में दोनों पार्टियों ने बड़े-बड़े वायदे किए हैं। भाजपा ने किसान क्रेडिट कार्ड पर एक लाख तक का ॠण पांच साल तक के लिए ब्याजमुक्त देने, 25 लाख करोड़ रुपये ग्रामीण विकास पर खर्च करने और सभी किसानों को 6 हजार रुपए सालाना देने का वायदा किया है तो वहीं कांग्रेस ने किसानों के लिए अलग बजट बनाने, जो किसान कर्ज अदा नहीं कर पाएंगे उन पर आपराधिक नहीं बल्कि दिवानी मामला चलाने और मनरेगा के तहत 150 दिनों का रोजगार देने की बात कही है। गरीबों पर दोनों ने ही अपनी-अपनी तरफ से मेहरबानी दिखाने की कोशिश की है। भाजपा ने 2022 तक सभी गरीब परिवारों को गैस सिलेंडर देने, हर परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराने, देश के सभी घरों में बिजली, पीने लायक पानी और शौचालय सुलभ कराने का वायदा किया है तो कांग्रेस ने न्यूनतम आय योजना के तहत 72 हजार रुपए सालाना आय सुनिश्‍चित करने की बात कही है। इसके तहत 20 प्रतिशत गरीब परिवारों की मदद के वायदे के साथ यह दावा किया गया कि गरीबों की संख्या में दस प्रतिशत की कमी आएगी। महिलाओं को भी नौकरी में 33 प्रतिशत आरक्षण देने, राफेल मामले की जांच कराने, इलेक्टोरल बांड खत्म करने और सर्वाधिक विवादास्पद इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन तथा वीवीपेट को टेम्पर- प्रूफ बनाने का वायदा भी किया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस देश को तोड़ना चाहती है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा समस्त संवैधानिक संस्थाओं को शनै:-शनै: कमजोर करना चाहती है, इसलिए यह चुनाव संविधान की रक्षा के मुद्दे पर विपक्ष लड़ रहा है। छोटे दुकानदारों, काश्तकारों और खेतिहर मजदूरों को 60 साल की उम्र के बाद पेंशन देने का वायदा भाजपा ने किया है।

शिक्षा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है क्योंकि इसके द्वारा ही देश की भावी पीढ़ी का निर्माण होता है। भाजपा का कहना है कि सभी शिक्षण संस्थाओं में सीटें बढ़ाई जाएंगी और 2024 तक 200 नए केंद्रीय व नवोदय विद्यालय खोले जाएंगे। नेशनल इंस्टीट्यूट टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर खोल कर शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार किया जाएगा तो कांग्रेस का वायदा है कि देश की जीडीपी का 6 प्रतिशत शिक्षा व्यवस्था पर खर्च किया जाएगा और सभी प्रकार की सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं को मजबूत करते हुए इनका शैक्षणिक स्तर उन्नत किया जाएगा ताकि छात्रों को महंगे और निजी शिक्षा क्षेत्र पर निर्भर न होना पड़े। यूनिवर्सिटी-कालेज, आईआईटी और आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों तक हर वर्ग की पहुंच सुनिश्‍चित हो सके ऐसे प्रयास किए जाएंगे। रोजगार के मुद्दे पर भाजपा का वायदा है कि 22 बड़े सेक्टरों में रोजगार पैदा करने के लिए ज्यादा मदद दी जाएगी। मुद्रा योजना के तहत 30 करोड़ लोगों को कर्ज दिया जाएगा। 20 हजार करोड़ रुपए से सीड स्टार्टअप को प्रारंभ किया जाएगा। राहुल गांधी का वायदा है कि मार्च 2020 तक 20 लाख खाली सरकारी पद भरे जाएंगे और दस लाख युवाओं को ग्राम पंचायतों में रोजगार दिया जाएगा। कारोबारी युवाओं को अपना काम-धंधा खोलने पर तीन साल तक किसी भी तरह की इजाजत नहीं लेना पड़ेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में भाजपा का वायदा है कि 2022 तक 75 नए मेडिकल कालेज और पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कालेज खोले जाएंगे, इस अवधि में डेढ़ लाख स्वास्थ्य कल्याण केंद्र भी बनाएं जाएंगे। 2024 तक डॉक्टरों की संख्या दुगुनी की जाएगी। स्वास्थ्य की गारंटी देते हुए कांग्रेस का वायदा है कि निजी बीमा कंपनियों के स्थान पर सरकारी कंपनियों से ही बीमा कराया जाएगा और इस बात के लिए बाध्य किया जाएगा कि वे बिना किसी लाभ के स्वास्थ्य की गारंटी देंगे। सरकारी अस्पतालों को मजबूती प्रदान की जाएगी ताकि गरीब से गरीब इंसान को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

अखिलेश यादव के घोषणापत्र में वायदा किया गया है कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन समाज के शोषित एवं वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। हमें इस बात पर गर्व है कि समाज के सबसे गरीब, सबसे शोषित व वंचित वर्ग की हम आवाज रहे हैं, यही कारण है कि हम महापरिवर्तन के लिए संकल्पित हैं। अमीरी और गरीबी के बीच बढ़ती खाई की चर्चा करते हुए कहा गया है कि आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि भारत विश्‍व का सबसे बड़ा गैर-बराबरी वाला देश है। देश के दस फीसदी सम्पन्न लोग 60 फीसदी सम्पत्ति पर काबिज हैं। आठ फीसदी धन देश के आधे से अधिक गरीब लोगों के पास है। असमानता को दूर करने के लिए सामाजिक गतिशीलता, आवास एवं आय इन तीन मोर्चों पर सर्वाधिक ध्यान दिया जाएगा, ताकि समानता और अत्याधिक प्रगतिशीलता आए। समाजवादी पेंशन योजना और लोहिया ग्रामीण आवास योजना को और अधिक मजबूत किया जाएगा तथा समाजवादी पेंशन योजना के तहत जरुरतमंद महिलाओं को 3 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाएगी।

और यह भी

सपा ने एक महत्वपूर्ण वायदा यह किया है कि ढाई करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति रखने वाले परिवारों की कुल सम्पत्ति पर दो फीसदी का अतिरिक्त टैक्स लगाकर सामाजिक हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। हमारी मान्यता है कि ज्यादा अमीर लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाना चाहिए। बेरोजगारी के संबंध में कहा गया है कि प्रत्येक साल एक लाख लोगों को नौकरियां देंगे। भर्ती प्रक्रिया को एक निश्‍चित समयसीमा के अंदर पूरा किया जाएगा और इसमें अनियमितता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों की शत-प्रतिशत कर्जमाफी करना सपा गठबंधन की पहली प्राथमिकता होगी।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक एवं भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक है।

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