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नरवा-गरूवा-घुरूवा-बारी संवर्धन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजूबत- मण्डल

रायपुर 09 फरवरी।छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आर.पी.मण्डल ने कहा है कि नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी के संरक्षण और संवर्धन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

श्री मण्डल आज यहां जिला कलेक्टोरेट परिसर स्थित रेडक्रॉस सभाकक्ष में नरवा-गरवा-घुरूवा-बाड़ी योजना (एनजीजीबी) के तहत गौठान तथा घुरूवा का चिन्हांकन एवं निर्माण के संबंध में आयोजित संभाग स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी संख्या में ग्रामीणजनों को अपने ही गांव में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। गांवों में गौठानों के बनने से गौसंवर्धन और इससे जुड़ी आजीविका के विकास के साथ ही किसानों को मवेशियों द्वारा फसल चरने की समस्या से निजात मिलेगी।किसान खरीफ के साथ-साथ आसानी से रबी की फसल भी ले सकेंगे।उन्होंने कहा कि ये कार्य तभी सफल होंगे जब इन कार्यो में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए।

उन्होने कहा कि सभी जिलों में 15 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में आगामी 28 फरवरी तक गौठान निर्माण के कार्य प्रारंभ हो जाए तथा प्रथम चरण का कार्य आगामी अप्रैल माह तक पूर्ण कर लिया जाए।उन्होने कहा कि गांव में गौधन का बेसलाईन सर्वे कर प्रति 100 गौधन के लिए एक एकड़ भूमि चिन्हांकित कर गौठान का निर्माण किया जाए।यदि किसी गांव में 300 गौधन है तो वहां तीन एकड़ में गौठान बनाया जाएगा।उन्होंने कहा कि गौधन के रख-रखाव के लिए पारम्परिक एवं प्रचलित व्यवस्था को ही बरकरार रखा जाए। गौठान को डे-केयर सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होने कहा कि गौठान में ग्रामीण के लिए चौपाल भी बनाया जाएगा।गौठान के नजदीक ही मवेशियों के लिए चारागाह भी बनाया जाएगा।गौठानों में कृत्रिम गर्भधान, टीकाकरण एवं बधियाकरण की सुविधाएं दी जाएगी। इससे दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार एवं दूध के उत्पादन में वृद्धि होगी। घुरूवा-गौठान में सामुदायिक आधार पर बायोगैस प्लांट, कम्पोस्ट इकाईयां एवं चारा विकास केन्द्र बनाए जाएंगे।इससे कम लागत में अधिक फसल उत्पादन एवं ऊर्जा उत्पादन का लाभ मिलेगा।

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