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म.प्र. में 28 नवम्बर को किसके सिर सजेगा ताज और कौन होगा बेताज – पटेल

अरूण पटेल

पुरानी फिल्म हरियाली और रास्ता का यह एक मशहूर गाना है कि-इब्तदाए इश्क में सारी रात जागे अल्ला जाने क्या होगा आगे, मौला जाने क्या होगा आगे। इस गाने को कुछ बदल कर इस प्रकार मौजू माना जा सकता है कि-कुर्सी के इश्क में  सारी रात जागे अल्ला जाने क्या होगा आगे, मौला जाने क्या होगा आगे। चुनाव के समय मतदाता ही अल्ला होता है, वही मौला होता है वही भगवान होता है, इसलिए वही जानता है कि होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र में अभी तक अपराजेय रहे और अब कांग्रेस उम्मीदवार बने शिवराज सरकार के वरिष्ठ मंत्री सरताज सिंह के सिर पर ताज सजेगा या विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा के सिर पर ताज बना रहेगा।

आजकल राजनेताओं को कुर्सी से इस कदर इश्क हो गया है कि वे 28 नवम्बर 2018 को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए आस्था और वफादारियां कुछ ऐसे बदल रहे हैं जैसे कि कपड़े बदलते हैं। नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में विधायिकी का ताज छिनने की आशंका में संजय शर्मा ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और उन्हें टिकिट भी मिल गयी। टिकिट पाने में तो वे सफल रहे, अब मतदाता इस बात का फैसला करेंगे कि उनके सिर पर विधायिकी का ताज यथावत रहे अथवा कांग्रेस से ताज मिलने की आस लगाये मुलायम सिंह कौरव जिन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है उनके सिर पर ताज रख दिया जाए।

जहां तक सरताज सिंह का सवाल है क्षेत्र में वे बाबूजी के नाम से जाने-पहचाने जाते हैं और उनकी मजबूत पकड़ का परिचय इस बात से मिलता है कि वे जितने भी लोकसभा चुनाव होशंगाबाद से लड़े कभी भी पराजित नहीं हुए। एक बार उनके स्थान पर सुंदरलाल पटवा लोकसभा सदस्य चुने गये। यहां तक कि चुनावी समर में उन्होंने कांग्रेस की राजनीति में हैवीवेट माने जाने वाले मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह को लोकसभा चुनाव में लगभग 80 हजार मतों से पराजित किया, जबकि जाति समीकरण पूरी तरह से अर्जुनसिंह के पलड़े को मजबूत करते थे। 1977 और 2003 की विपरीत परिस्थितियों में सिवनी-मालवा से चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के हजारीलाल रघुवंशी से उनका 2008 में मुकाबला हुआ और उस समय तक अजेय माने जाने वाले हजारीलाल चुनावी समर में सिवनी मालवा में चित हो गए। उसके बाद 2013 में फिर दोनों का मुकाबला हुआ और ताज सरताज के सिर पर ही सजा रहा। केवल 1985 की इंदिरा गांधी सहानुभूति की पृष्ठभूमि में हुए विधानसभा चुनाव में सरताज सिंह इटारसी में कांग्रेस के विजय दुबे काकू भाई से 1867 मतों से चुनाव हारे थे।

जहां तक सीताशरण शर्मा का सवाल है 1990 से 2013 तक उन्होंने चार विधानसभा चुनाव लड़े और हर चुनाव में सफलता हासिल की। तीन चुनाव उन्होंने इटारसी क्षेत्र से और 2013 का चुनाव होशंगाबाद क्षेत्र से लड़ा जो कि इटारसी व होशंगाबाद को मिलाकर 2008 में बना था। 2003 में उनके स्थान पर उनके भाई गिरिजाशंकर शर्मा पहले इटारसी से और 2008 में होशंगाबाद से विधानसभा चुनाव जीते। इस क्षेत्र पर शर्मा परिवार की मजबूत पकड़ है लेकिन चुनावी मुकाबला इसलिए दिलचस्प हो गया है क्योंकि सरताज सिंह अपराजेय योद्धा को चुनावी समर में शिकस्त देने में महारत हासिल कर चुके हैं। सरताज का दावा है कि उन्होंने अपराजेय योद्धा हजारीलाल को परास्त कर दिया है और डॉ. सीताशरण शर्मा को तो वे घर से हाथ पकड़कर चुनाव लड़ाने के लिए लाये थे और विधायक का चुनाव भाजपा से जिता दिया था, अब उन्हें घर तक छोड़ कर आयेंगे। यानी उन्हें पक्का भरोसा है कि ताज उनके सिर पर ही सजेगा।

पार्टी बदलने से सरताज की स्थिति पर कोई विशेष असर पड़ने वाला नहीं है क्योंकि पूरे संसदीय क्षेत्र में उनके मतदाताओं से सीधे रिश्ते रहे हैं और इसके लिए उन्हें बीच में कभी किसी मध्यस्थ की जरुरत नहीं पड़ी। अब तो सोने में सुहागे जैसी स्थिति हो गयी है कि जिनसे सीधे रिश्ते थे वे तो साथ देंगे ही लेकिन बोनस में कांग्रेस के परम्परागत वोट भी उन्हें मिलेंगे। देखने वाली बात यही होगी कि आखिर अपने सिर ताज सजाने की चाह रखने वाले सरताज सीताशरण को बेताज कर पाते हैं या नहीं।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक एवं भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक है।

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