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म.प्र. में ज्योतिरादित्य व कमलनाथ को भी सुनने उमड़ रहा जनमानस – अरुण पटेल

अरूण पटेल

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन-आशीर्वाद यात्रा को मिल रहे भारी जन-समर्थन के बाद कांग्रेस भी अब मैदान में उतर पड़ी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा निकाली जा रही परिवर्तन रैलियों में इन दोनों नेताओं को सुनने के लिए जनमानस बड़ी संख्या में उमड़ रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा पिछले कुछ माहों से निकाली जा रही न्याय यात्रा को भी अच्छा खासा समर्थन मिल रहा है तो वहीं दूसरी ओर पोल खोल यात्रा पर निकले प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी को सुनने के लिए भी भीड़ जुट रही है। यह शायद इस बात का परिचायक है कि मतदाता संभवत: दोनों ही दलों की बातें सुनने व समझने और उनके वायदों, इरादों और दिखाये जा रहे स्वप्न को परख रहा है। किस पर उसने यकीन किया यह चुनाव नतीजों से ही पता चलेगा।

युग पुरुष पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी का 93 वर्ष की आयु में 16 अगस्त को निधन हो गया। उनके इस नश्वर संसार से महाप्रयाण से देश, दुनिया व प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। अटलजी ने भले ही इस दुनिया को छोड़ दिया हो लेकिन वे अटल थे, अटल हैं और अटल रहेंगे। देश और दुनिया में एक महानायक के रूप में उभरे अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर में हुआ था और उनका मध्यप्रदेश से विशेष लगाव रहा था। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदेश में अटल अस्थिकलश यात्रा निकालने वाली है। चूंकि यह साल चुनावी वर्ष है इसलिए भाजपा चाहती है कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों से यह यात्रा गुजरे। इस यात्रा का उद्देश्य अटलजी की यादों को लोगों के दिल में सदा जिंदा रखना और उनके जीवन से जुड़े पहलुओं को जनता को दिखाना है। इसके लिए भाजपा नेता जिलों-जिलों और गांव-गांव जाकर सुनाएंगे। अटलजी दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर सबके प्रिय थे और यही कारण रहा कि प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव समिति की पहली बैठक स्थगित करते हुए उसमें अटलजी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपनी छिंदवाड़ा की परिवर्तन रैली भी स्थगित कर दी। शिवराज ने भी कुछ समय के लिए अपनी जन-आशीर्वाद यात्रा को स्थगित कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी गैरतगंज में चल रही परिवर्तन रैली की सभा को जानकारी मिलते ही श्रद्धांजलि सभा में परिवर्तित कर अटलजी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा वहीं कहा कि आगे के सारे कार्यक्रम निरस्त करते हुए रात में ही दिल्ली रवाना हो रहे हैं। अब सिंधिया 20 अगस्त को उज्जैन आयेंगे और महाकाल की निकलने वाली सवारी में शामिल होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी अपने एक दिन आगे का भोपाल का कार्यक्रम स्थगित कर श्रद्धासुमन अर्पित करने दिल्ली रवाना हो गये। अटलजी जितने भाजपा में लोकप्रिय थे उतने ही विपक्षी दलों में भी वे सम्मान व श्रद्धा के पात्र रहे हैं।

कमलनाथ की धार और बड़वानी जिले की परिवर्तन रैली तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया की रतलाम, मंदसौर (मनासा), सागर और रायसेन आदि जिलों में हुई परिवर्तन रैलियों में उन्हें सुनने लोगों का भारी जमावड़ा रहा। बड़वानी जिले के राजपुर और धार की सभाओं में उमड़े जनसमूह को देखते हुए उत्साहित कमलनाथ ने कहा यह इस बात का संकेत है कि इस बार मध्यप्रदेश में सरकार कांग्रेस की बनेगी, क्योंकि यह लाये हुए नहीं बल्कि स्वयं आये हुए लोग हैं। शिवराज की जन-आशीर्वाद यात्रा और इस रैली में यही मौलिक अन्तर है। इस प्रकार उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से तंज कसा कि शिवराज की यात्रा सरकारी है, सारा खर्च सरकार उठा रही है और भीड़ भी प्रशासन जुटा रहा है। मेरी रैली में सब कुछ जनता का है और भीड़ भी खुद आ रही है। सागर और रायसेन जिले की परिवर्तन रैलियों में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जहां मंदसौर में किसानों पर हुए गोलीचालन को लेकर शिवराज सरकार की घेराबंदी की तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 14 वर्षों में भाजपा सरकार ने प्रदेश को बदहाली के कगार पर लाकर छोड़ दिया है। किसान बदहाल, नौजवान परेशान हैं और महिलाएं यहां तक कि हमारी बेटियां भी अब सुरक्षित नहीं हैं। पूरे देश में महिला अपराध के मामले में मध्यप्रदेश अव्वल है लेकिन ‘मामा’ आशीर्वाद लेने में व्यस्त हैं, प्रदेश के हालात ऐसे हैं कि अब छोटी-छोटी बेटियां, मूक-बधिर बच्चियां तक दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं। भाजपा नेता पिछले 14 सालों में केवल भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जितना प्यारा किसानों के लिए अपना खेत होता है उससे ज्यादा प्यारी भाजपा नेताओं को रेत है। शिवराज ने नर्मदा सेवा यात्रा निकाली थी, वह नर्मदा सेवा यात्रा नहीं बल्कि नर्मदा सर्वे यात्रा थी, दिन में भ्रमण और रात में अवैध उत्खनन। इस सरकार में भ्रष्टाचार का विकेंद्रीकरण हो गया है और अब तो हमारे प्रदेश के गांव-गांव में भष्टाचार व्याप्त है और ये जन-आशीर्वाद यात्रा का स्वांग रच रहे हैं। रेत का अवैध उत्खनन यदि इसी रफ्तार से चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब भाजपा के राज में रेत मिलेगी राशन से। राम मंदिर मुद्दे पर भी तंज कसते हुए सिंधिया कहते हैं कि भाजपा कसम खाती है कि मंदिर वहीं बनायेंगे लेकिन तारीख नहीं बतायेंगे।

शिवराज और कमलनाथ के वायदे और इरादे

स्वाधीनता दिवस के अवसर पर शिवराज ने लाल परेड ग्राउंड से तो कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश में प्रदेश की जनता को कुछ वायदे किए तो कुछ अपने इरादे जतलाये। इन वायदों व इरादों का विशेष अर्थ इसलिए है क्योंकि यह चुनावी साल है और दोनों ने ही अपने-अपने ढंग से मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के अवसर के रूप में इसे लिया है। शिवराज ने 15 अगस्त के संदेश में लोगों से वायदा किया कि नारों से आगे निकल बुनियादी सेवायें देकर गरीबी हटाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता और प्रतिबद्धता है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपेक्षा की कि वे संकल्प लें कि प्रदेश व देश के लिए हर बलिदान को तैयार रहेंगे। अब हमारा लक्ष्य प्रदेश को समृद्ध बनाने की ओर अग्रसर होना है, इसके लिए विकास व कल्याण के सभी क्षेत्रों में विभागवार पांच-साला रोडमैप पर अमल होगा। विकास के लिए नियमित बजट प्रावधानों पर निर्भर न रहकर आय के अन्य स्रोत भी तलाश रहे हैं ताकि प्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए धन की कमी आड़े न आये। शिवराज ने कहा कि इस वर्ष ढाई लाख युवाओं को रोजगार मिला है, औद्योगिक नीति में मूलभ्ाूत परिवर्तन कर अब टेक्स में छूट देने की बजाए निवेश में सीधे सहायता देने का निर्णय किया गया है। अगले पांच वर्षों में प्रदेश में जनजाति कल्याण पर दो लाख करोड़ रुपये के कार्य किए जायेंगे जिससे समस्त जनजातियों का सर्वांगीण विकास होगा। पेसा कानून को वास्तविक रूप से लागू करने के लिए प्रत्येक गांव में जनजाति सभा का गठन करेंगे। कमलनाथ ने अपने 15 अगस्त के संदेश में कहा कि जिन आदर्शों व सपनों के साथ हमें राष्ट्रीय नेताओं ने आजाद भारत सौंपा है उनकी गरिमा का ध्यान रखना हमारा कर्तव्य है एवं हमें दूसरी आजादी का सपना पूरा करना है। यह दूसरी आजादी गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी, कुपोषण और हिंसा के वातावरण से उबारते हुए नफरत और अलगाव का जो माहौल बनाया जा रहा है उसे समाप्त करना है। जिन संस्थानों और दलों का भारत की आजादी में कोई योगदान नहीं है ऐसे लोगों से आजादी के आदर्शों व मूल्यों को खतरा बना हुआ है। देश के बदलते हुए परिदृश्य में हमारी आजादी को खतरा उन ताकतों से है जो अंदरूनी तौर पर छिपे बैठे हैं तथा वे हमारी सोचने, बोलने व लिखने की आजादी छीनना चाहते हैं। ऐसे लोगों से हमें एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है। आजादी के दुश्मनों से हमें कहना होगा कि तुम नफरत करो हम प्यार करेंगे, तुम कड़वा बोलो हम मीठा बोलेंगे, तुम समाज को बांटने का काम करो हम समाज को जोड़ने का काम करेंगे। तुम अशांति फैलाओ हम शांति की रक्षा करेंगे क्योंकि हम कांग्रेस हैं। लाखों युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, भ्रष्टाचार नियंत्रण से बाहर हो गया है, महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजातियों पर अत्याचार की घटनायें बढ़ रही हैं, किसानों पर भारी आपदा है और आवाज उठाने पर उन्हें गोली मार दी जाती है। टेंडरों पर घोटाले-दर-घोटाले हो रहे हैं, इस व्यवस्था से प्रदेश को मुक्त कराने का अब समय आ गया है।

और यह भी

कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र 1967 की चुनावी सभाओं में कहा करते थे कि किसानों का लगान माफ और जनसंघ साफ, उसी तर्ज पर नये अंदाज में कमलनाथ ने नारा दिया है कि “कर्ज माफ, बिजली का बिल हॉफ और इस बार भाजपा साफ।’’ भावनात्मक मुद्दे को भी कमलनाथ अपने ढंग से उठाते हुए कहते हैं कि माँ नर्मदा हमारी आस्था का प्रतीक है और इस सरकार ने उसे भी नहीं बख्शा, रेत के अवैध उत्खनन के नाम पर नर्मदा को छलनी कर दिया है। बात करते हैं राष्ट्रवाद की लेकिन भाजपा में एक भी आदमी नहीं जिसने आजादी की लड़ाई में भाग लिया हो।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक एवं भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक है।

 

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