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छत्तीसगढ़ में नदियों को जोड़ने की तैयारी – बृजमोहन

रायपुर 05 दिसम्बर।छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए राज्य में नदियों को आपस में जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।

कृषि और जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज यहां अपने विभागों की 14 वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि इसके लिए इंटर लिकिंग परियोजना बनाई गई है और सर्वेक्षण करवाया जा रहा है।इनमें महानदी-तांदुला, पैरी-महानदी, रेहर, अटेम, अहिरन-खारंग और हसदेव-केवई इंटरलिकिंग परियोजना शामिल हैं।उन्होने बताया कि इन नदियों में निर्मित सिंचाई बांधों में जब शत-प्रतिशत जल भराव हो जाएगा तो उसके बाद वहां के अतिरिक्त पानी का समुचित उपयोग करने के लिए यह परियोजना तैयार की गई है।

उन्होने राज्य में खेती-किसानी के लिए कई बेहतरीन योजनाएं शुरू करने का दावा करते हुए कहा कि राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चिराग योजना प्रस्तावित है।  उन्होंने बताया कि चिराग योजना के लिए 1500 करोड़ रूपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए विश्व बैंक से सहायता ली जाएगी। इस योजना में लगभग चार लाख किसान परिवारों को जोड़ा जाएगा। उनके उत्पादन समूह बनाए जाएंगे और लगभग छह हजार कृषि उद्यमों की स्थापना की जाएगी। करीब 50 हजार युवाओं को भी चिराग योजना से जोड़कर उन्हें खेती-किसानी से संबंधित कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

श्री अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने 14 साल में जल संसाधन विभाग का बजट 493 करोड़ 90 लाख रूपए से बढ़ाकर 3155 करोड़ रूपए कर दिया है। इस प्रकार विभाग के बजट में सात गुना वृद्धि हुई है।प्रदेश में अनेक स्वीकृत और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को अभियान चलाकर पूर्ण किया गया है।इसके फलस्वरूप राज्य की सिंचाई क्षमता 23 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है। अब तक 20 लाख 59 हजार हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्मित की जा चुकी है।

उन्होने बताया कि 14 वर्ष की इस विकास यात्रा में तीन वृहद सिंचाई योजनाओं को पूर्ण किया गया है, जिनमें महानदी परियोजना समूह, मिनीमाता (हसदेव) बांगो परियोजना और जोंक व्यपवर्तन परियोजना शामिल हैं।इसी तरह छह मध्यम सिंचाई योजनाओं कोसारटेडा, खरखरा मोहदीपाट, सुतियापाट जलाशय परियोजना, कर्रानाला बैराज, अपर जोंक परियोजना और मांड व्यपवर्तन परियोजना का भी निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।उन्होंने बताया कि नदी-नालों में 440 लघु सिंचाई योजनाओं और 651 एनीकटों तथा स्टाप डेमों का भी निर्माण किया गया है।

कृषि विभाग की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए श्री अग्रवाल ने बताया कि गत 14 वर्ष में केन्द्र सरकार से राज्य को चार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इनमें से तीन पुरस्कार चावल उत्पादन पर और एक पुरस्कार दलहन उत्पादन पर मिला है। श्री अग्रवाल ने बताया कि विगत 14 वर्ष में कृषि विभाग का बजट लगभग 184 करोड़ रूपए से बढ़कर वर्तमान में 1887 करोड़ 64 लाख रूपए हो गया है, जो वर्ष 2003-04 की तुलना में 926 प्रतिशत ज्यादा है। विगत 14 वर्ष में राज्य में धान के उत्पादन में 47 प्रतिशत, तिलहन के उत्पादन में 158 प्रतिशत और दलहन के उत्पादन में 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

कृषि मंत्री ने बताया कि विभिन्न फसलों के उन्नत बीज उत्पादन में भी छत्तीसगढ़ 14 साल में आत्मनिर्भर हो गया है। इस अवधि में राज्य में उन्नत बीजों का उत्पादन 44 हजार 400 क्विंटल से बढ़कर वर्ष 2016-17 तक दस लाख 50 हजार क्विंटल अर्थात् 23 गुना हो गया है। बीजों के भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए भी कृषि विभाग ने शानदार काम किया है। उन्होंने बताया कि 14 साल पहले राज्य में केवल 12 गोदम थे, जिनकी भंडारण क्षमता सिर्फ सात हजार 500 मीटरिक टन थी। विभाग ने अभियान चलाकर 103 गोदामों का निर्माण किया, जिन्हें मिलाकर भंडारण क्षमता 81 हजार 650 मीटरिक टन हो गई है।

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