छत्तीसगढ़ में अगले वर्ष विद्युत उत्पादन हो जायेगा 3424 मेगावाट

रायपुर 18नवम्बर।छत्तीसगढ़ सरकार के सार्वजनिक उपक्रम छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन कम्पनी द्वारा लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ रूपए की लागत से निर्माणाधीन दो ताप विद्युत संयंत्रों के क्रियाशील होने पर कम्पनी की उत्पादन क्षमता अगले वर्ष बढ़कर 3424 मेगावाट हो जाएगी।
राज्य के ऊर्जा सचिव अमन सिंह ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जांजगीर-चाम्पा जिले के मड़वा-तेन्दूभाठा में कम्पनी द्वारा छह हजार 318 करोड़ रूपए की लागत से एक हजार मेगावाट क्षमता के विशाल ताप विद्युत संयंत्र का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसके अलावा उद्योग नगरी कोरबा में पांच सौ मेगावाट क्षमता की कोरबा पश्चिम ताप बिजली परियोजना का निर्माण भी युध्द स्तर पर चल रहा है। इस पर तीन हजार 156 करोड़ रूपए की लागत आएगी।
उन्होने बताया कि कम्पनी में मड़वा-तेन्दूभाठा ताप बिजली परियोजना की पांच सौ मेगावाट की प्रथम इकाई सहित पांच सौ मेगावाट की कोरबा (पश्चिम) परियोजना में बॉयलर का हाइड्रोलिक परीक्षण पिछले माह सफलतापूर्वक सम्पन कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण के सुव्यवस्थित रूप से हुए सफल परीक्षण के बाद अब इनमें बॉयलर लाईट-अप करने की भी तैयारी तेजी से चल रही है।
श्री सिंह ने बताया कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश के विद्युत मंडल की बिजली उत्पादन क्षमता एक हजार 360 मेगावाट थी।इस बीच वर्ष 07 में दो हजार 452 करोड़ रूपए की लागत से कोरबा में पांच सौ मेगावाट क्षमता के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप बिजली संयंत्र (कोरबा पूर्व) का निर्माण पूर्ण कर लिया गया और उसमें उत्पादन भी शुरू हो गया।इसके साथ ही कम्पनी के लगभग 25 वर्ष पुराने बिजली संयंत्रों का बेहतर रख-रखाव कर उनकी क्षमता बढ़ाई गयी।इन सब उपायों के फलस्वरूप राज्य के इस सार्वजनिक उपक्रम की बिजली उत्पादन क्षमता चालू वर्ष 11 तक बढ़कर एक हजार 924 मेगावाट हो गयी है।
उन्होने बताया कि कोरबा (पूर्व) स्थित और वर्ष 07 में निर्मित डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ताप बिजली संयंत्र के क्रियाशील होने के बाद छत्तीसगढ़ को जनवरी 08 से देश के प्रथम और इकलौते विद्युत कटौती मुक्त राज्य के रूप में चिन्हांकित होने का गौरव मिल रहा है।
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