Sunday, May 20, 2012
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खदान वाले इलाकों में लगने चाहिए खनिज आधारित उद्योग-रमन

About chhattisgarh - उद्योग

रायपुर 12 दिसम्बर।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एक बार फिर कहा है कि खनिज आधारित उद्योग विशेष रूप से उन्हीं इलाकों अथवा राज्यों में लगने चाहिए, जहां उन खनिजों की खदानें स्थित हों।

    डॉ.सिंह ने आज यहां छत्तीसगढ़ के दस वर्ष-विकास, चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के सहयोग से एक राष्ट्रीय समाचार पत्रिका 'द संडे इंडियन' द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सेमीनार का शुभारंभ करते हुए कहा कि इससे उन खनिजों पर आधारित अंतिम उत्पाद वहीं तैयार होगा और वेल्यू एडिशन के रूप में उसका समुचित आर्थिक लाभ उस राज्य अथवा क्षेत्र विशेष की जनता को मिल सकेगा।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खनिजों पर आधारित उद्योगो का कम से कम 26 प्रतिशत मुनाफा स्थानीय विकास और जनकल्याण के कार्यों पर खर्च होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय खनिज नीति में प्रावधान किए जाने चाहिए।

  

   उन्होंने कहा कि देश में निकट भविष्य में नक्सल हिंसा को खत्म करने में सबसे बड़ा योगदान छत्तीसगढ़ राज्य का होगा, जहां जनता और सुरक्षा बलों के सहयोग से राज्य सरकार इस राष्ट्रीय समस्या का गंभीरता से मुकाबला कर रही है। अगले दस वर्ष बाद देश के इतिहास में यह लिखा जाएगा कि नक्सल हिंसा को खत्म करने में छत्तीसगढ़ ने सबसे ज्यादा योगदान दिया है। डॉ.सिंह ने कहा कि राज्य में नक्सल हिंसा की घटनाएं इसलिए अधिक लग रही है क्योंकि हम सब मिलकर उनका मुकाबला कर रहे हैं।

   सेमीनार के शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे ने की।प्रदेश के स्कूल शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू और राज्यसभा सांसद नंदकुमार साय सहित सर्वश्री अनिल माधव दवे, टीवी पत्रकार सुश्री वर्तिका नंदा और अशोक उपाध्याय भी उद्धाटन सत्र में उपस्थित थे।

    डॉ.सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने विगत दस वर्षों की अपनी विकास यात्रा में छोटे राज्यों के निर्माण की सार्थकता साबित कर दी है।यह जब मध्यप्रदेश जैसे विशाल आकार वाले राज्य का हिस्सा था तो छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर से उस समय की राजधानी भोपाल तक आना जाना बहुत कठिन था और वहां जाने पर छत्तीसगढ़ के लोगों को भाषा, बोली, रहन-सहन और अन्य कुछ सामाजिक कारणों से बेगानेपन का अहसास होता था।उन्होने कहा कि राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ ने विकास की दृष्टि से अनेक सफलताएं प्राप्त की है।

   उन्होने बस्तर अंचल में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को जमीन देने के दुष्प्रचार का जोरदार शब्दों में खंडन करते हुए कहा कि वहां किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी को सरकार की ओर से कोई भूमि नहीं दी गई है और लौह अयस्क भी नहीं दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग भ्रमवश या कुछ अन्य कारणों से यह प्रचार करते हैं कि बस्तर में सामाजिक असमानता के कारण नक्सलवाद है जबकि सच यह है कि वहां ऊंच-नीच का कोई भेदभाव नहीं है। वहां तो भूमि स्वामी और भूमिहीन सभी मिलकर वनों में तेंदूपत्ता तोड़ते हैं। बस्तर के वनवासियों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से लघु वन उपजों पर आधारित है। 

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