Sunday, May 20, 2012
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छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति

About chhattisgarh - पर्यटन

   छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति

छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति राज्य की अद्वितीय छवि स्थापित करके उसे एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य स्थल के रूप में विकसित करने पर केन्द्रित है । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य द्वारा कुछ विशिष्ट प्रयास रेखांकित किए गए है, जैसे कि अधोसंरचना एवं संस्थागत विकास, पर्यटन उत्पाद, विपणन आदि । इन नीति का प्रमुख उद्देश्य शासन की भूमिका को सुविधापरक बनाना एवं स्थानीय समुदाय की बौध्दिक संपदा एवं अधिकारों को सम्मान देना है ।

पर्यटन नीति का क्रियान्वयन करते समय राज्य केवल उन प्रयत्नों को प्रोत्साहित करेगा जिससे पर्यटन क्षेत्र का संवहनीय विकास होता हो एवं पर्यावरण का संतुलन बना रहे । इसके अतिरिक्त राज्य सरकार स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी एवं राज्य की समृध्द सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रोत्साहन में उनकी भागीदारी सुनिष्चित करेगी ।

इन उद्देश्यो की प्राप्ति हेतु राज्य उपयुक्त कानून पारित करेगा एवं पर्यटन क्षेत्र के विकास एवं पर्र्यटन नीति के क्रियान्वयन हेतु राज्य पर्यटन विकास बोर्ड को नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित करेगा ।

पर्यटन नीति के प्रमुख बिंन्दु

01. आधाभूत सुविधायें एवं संस्थागत विकास -

पर्यटन की वास्तविक क्षमता का सदुपयोग करने के लिए राज्य शासन द्वारा वृहद स्तर पर मूलभूत सुविधाओं का विकास एवं सुधार तथा प्रदेश में निजी निवेश हेतु अनुकुल वातावरण का निर्माण करने के लिए चयनात्मक एवं एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जावेगा । पर्यटन का विकास मुख्य रूप से निजी क्षेत्र के द्वारा किया जावेगा एवं शासन की भूमिका सुविधापरक एवं प्रेरणास्त्रोत प्रदाय करने की होगी ।

02. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन -

q  पर्यटन के उद्योग का दर्जा दिया जाएगा ताकि अधोसंरचना विकास/वृहद पर्यटन परियोजनाओं को उद्योगों के समतुल्य सहायता, सुविधा एवं बिजली दरों में रियायतें उपलब्ध हो सकें ।

q  पर्यटन स्थलों की क्षमता दर्रशाने हेतु प्रारंभिक तौर पर नाभकीय अधोसंरचना के निर्माण के उद्देश्य से राज्य शासन विशेष पर्यटन क्षेत्रों में स्थापित की जाने वाली परियोजनाओं को पूंजीगत व्यय का 15 प्रतिषत निवेश अनुदान उपलब्ध करायेगा जो 20 लाख रूपये से अधिक नहीं होगा ।

q  पर्यटन क्षेत्र के अधोसंरचना विकास में निजी निवेश के प्रोत्साहन हेतु राज्य शासन शासकीय अंशदान के रूप में शासकीय भूमि विक्रय, पट्टे अथवा संयुक्त क्षेत्र परियोजनाएं हेतु उपलब्ध कराएगा ।

q  पर्यटन क्षेत्र के विकास की आवश्यकताओं के संदर्भ में करों का युक्तिकरण करना । राज्य शासन द्वारा विशेष पर्यटन क्षेत्रों में एक निष्चित राशि से ऊपर के निवेश वाली परियोजनाओं को विलासिता एवं मनोरजन कर से छूट दी जाएगी ।

03. मूलभूत अन्तसंबंध एवं मानव संसाधन विकास -

q  पर्यटन केन्द्रों के सड़क नेटवर्क में सुधार ।

q  पर्यटन बसों की संख्या में वृध्दि एवं मुख्य पर्यटन केंद्रों को जोड़ने वाली सड़कों किनारे पर्यटन सुविधाओं एवं पेट्रोल पंपो का विकास ।

q  चार्टड उड़ानों को प्रोत्साहित कर वायुयान चलाने हेतु मूलभूत सुविधाओं में सुधार एवं दूरस्थ क्षेत्रों में हेलीकाप्टर सुविधाओं को प्रोत्साहित करना । 

04. संस्थागत रचनाओं का सशक्तिकरण -

q  राज्य में एक पर्यटन विकास मंडल का गठन किया जाएगा जो एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी । यह एजेंसी विकास योजनाओं का निर्माण, निर्णय, पर्यटन क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न संस्थाओं से समन्वय, निवेषकों को मार्गदर्षन के लोक निर्माण, सिंचाई कला एवं संस्कृति विभाग समन्वय कर पर्यटन क्षेत्र में अंतरसंबंध क्षेत्र में स्थापित करेगी । बोर्ड में शासकीय सेवकों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा ।

 05. पर्यटन उत्पादों के प्रदाय में सुधार -

परिस्थितिकी पर्यटन - राज्य स्थानीय सहभागिता के आधार पर प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का चयन कर उनके उचित विकास के लिए सक्रिय कार्य करेगा । वन्यप्राणी क्षेत्र, केम्पिंग स्थल, ट्रेंकिग सुविधा जैसे प्राथमिक आकर्षण केंद्रों का विकास किया जायेगा । सोनमुड़ा (मरवाही), मैनपाट सरगुजा, केशकाल घाटी (कांकेर) चैतुरगढ़, (बिलासपुर), बगीचा (जशपुर), कुटुमसर गुफा, कैलाश गुफा, तीरथगढ़ जल प्रपात, चित्रकोट जल प्रपात (बस्तर) एवं कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान बारनवारा, सीतानदी, उदंती,अचानकमार अभ्यारण्यों का वन्य प्रणियों एवं प्राकृतिक पर्यटन के रूप में विकास किया जाएगा ।

उपरोक्त के अलावा राज्य में परिस्थितिकी पर्यटन विकास को बढ़ाया देने हेतु औषधि पौधों की बहुलता का लाभ उठाकर, हर्बल उद्यानों का विकास तथा प्राकृतिक स्वास्थ्य के लिए योगा, आयुर्वेद रेसार्ट आदि के विकास पर बल दिया जाएगा ।

साहसिक पर्यटन - राज्य में साहसिक खेलकूद जैसे टे्किंग, पर्वतारोहण, नौकायन, वाटर राफ्टिंग, बंगी जम्पिंग आदि का विकास किया जाएगा । राज्य सरकार साहसिक खेल गतिविधियों के विकास हेतु युवकों/युवतियों को प्रशिक्षण की व्यवस्था करायेगा जिससे कि राज्य में इन व्यावसायिक स्तर पर खेल गतिविधियों का विकास हो । महानदी, गंगरेल बांध, माडमसिल्ली बांध, कोडार बांध का विकास साहसिक खेलों हेतु किया जाएगा ।

06. प्रभावशाली विपणन -

q  विश्वास जागृत करने वाली परियोजनाओं की पहचान कर उनका विकास करेगा स्थानीय आकर्षण के केंद्रों पर ध्यान केन्द्रित हो सके।

q  पर्यटन से संबंधित सूचना एवं प्रचार हेतु पर्यटन पोर्टल,मल्टी मीडिया, सी.डी. रोम्स का विकास करेगा ।

q  समय-समय पर पर्यटन बाजार पर शोध कर विष्लेष्ण किया जाएगा जिससे पर्यटकों का पर्यटन झुकाव एवं संतुष्टि मूल्याकंन पर आधारित विपणन नीति का निर्माण किया जा सकें ।

सभी पर्यटन केंद्रों पर पर्यटकों के लिए मैत्रीपूर्ण कदम जैसे मीटर युक्त टैक्सी, कम्प्यूटर आधारित सूचनाएं एवं आरक्षण व्यवस्था, व्यवस्थित शांपिग काम्प्लेक्स तथा स्मारिका, ब्रोशर्स, लीफलेट एवं अन्य स्थानीय वस्तुओं की विक्रय की व्यवस्था करेगा ।
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