Monday , August 8 2022
Home / देश-विदेश / हरिद्वार के जिला जज से डेढ़ लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला आया सामने, पढ़े पूरी खबर

हरिद्वार के जिला जज से डेढ़ लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला आया सामने, पढ़े पूरी खबर

व्हाट्सएप पर परिचित बन कर मैसेज भेजने के बाद हरिद्वार के जिला जज से डेढ़ लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सिडकुल थाने में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जिला जज अनिरुद्ध भट्ट के मोबाइल पर भेजा वॉट्सऐप मैसेज पुलिस के मुताबिक, हरिद्वार जिला एवं सत्र न्यायालय में अपर जिला जज अनिरुद्ध भट्ट के मोबाइल फोन पर अनजान नंबर से एक वॉट्सऐप मैसेज आया। जिसमें उनके एक परिचित का नाम लेकर उनसे 10 हजार रुपये के 15 अमेजान पे ई-गिफ्ट कार्ड मांगे और उसका पैसा शाम तक वापस करने की बात लिखी थी। कुछ देर बाद खाते से निकल गए डेढ़ लाख रुपये जिस पर अपर जिला जज ने गिफ्ट कार्ड खरीद कर उसका लिंक वॉट्सऐप पर मैसेज कर दिया गया। कुछ देर बाद उनके खाते से डेढ़ लाख रुपये गायब हो गए। बाद में नंबर की जांच करने पर पता चला कि वह फर्जी है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी परिचित ने उनको कोई मैसेज नहीं भेजा था। तब एडीजे ने सिडकुल थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। इंस्पेक्टर सिडकुल प्रमोद उनियाल ने बताया कि धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। चेक बाउंस के दोषी को छह माह का कारावास चेक बाउंस के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी को छह माह के कठोर कारावास की सजा सुनाई। ऋषिकेश निवासी अनुज कालिया ने इस मामले में न्यायालय में वाद दायर किया था। अक्टूबर 2015 में परिचित राजेंद्र सिंह ने उनसे 15 लाख रुपये उधार लिए थे। दो महीने बाद उधार की रकम चुकाने के एवज में राजेंद्र सिंह ने पांच दिसंबर 2015 को 15 लाख रुपये का चेक दिया था। जब तय तारीख आने पर चेक बैंक में प्रस्तुत किया गया तो बैंक ने खाते में रकम न होने पर चेक को लौटा दिया। चेक बाउंस होने पर कोर्ट नोटिस भिजवाया। नोटिस प्राप्त करने के बाद भी उधार की रकम नहीं लौटाई। जिसके बाद यह मामला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन था। इस मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भवदीप की अदालत ने राजेंद्र सिंह को दोषी पाया। अधिवक्ता अमित अग्रवाल ने बताया कि न्यायालय ने आरोपित राजेंद्र सिंह को छह माह के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने क्षतिपूर्ति के रूप में 16 लाख 50 हजार रुपये की धनराशि अ