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वोट एवं बुलेट ट्रेन का खेल – रघु ठाकुर

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व जापान के प्रधानमंत्री श्री आबे के बीच, जो बातचीत व करार हुआ, उसी का एक हिस्सा देश में, बुलेट ट्रेन के लिये, जापान की भूमिका का निर्णय है।जापान अहमदाबाद से मुम्बई के बीच, बुलेट ट्रेन की परियोजना को क्रियान्वित करायेगा तथा भारत को इसके लिये 98000 करोड़ रुपये का कर्ज देगा जो एक प्रतिशत ब्याज पर 50 वर्षो में देय होगा। इस बुलेट कारीडोर की लंबाई 505 कि.मी. होगी, तथा 300 कि.मी. की गति से चलकर दो घंटे में, यात्रा पूरी होगी। कुल परियोजना का 81 प्रतिशत जापान कर्ज के रुप में व्यय करेगा तथा शेष 19 प्रतिशत यानी लगभग 18000 करोड़ रुपये भारत की परियोजना व्यय में हिस्सेदारी होगी। जाहिर है कि भारत की हिस्सेदारी मुख्यतः अधिक व्यय व अन्य साधारण व्यय में होगी। परंतु मूल योजना, जिसमें, मशीन कोच आदि शामिल होगे, को जापान उपलब्ध करायेगा। ऊपर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि यह योजना बड़ी उपलब्धि है क्योंकि जापान मात्र एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देगा। परंतु इस योजना के विभिन्न पक्षों को समझना होगाः-

1. भारत को लगभग 2000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की कर्ज की किश्त व प्रथम वर्ष में 1000 करोड़ रुपया ब्याज के रुप में देय होगा। और क्रमशः जो किश्ते चुकानी पड़ेंगी व ब्याज कम होगा वह अंतर भी कुल 50 वर्षो में 25 हजार करोड़ के आस-पास पहॅुचेगा, और अगर उसमें कोई चूक हुई तो 4.5 प्रतिशत ब्याज की दर लगेगी जिस का खुलासा यद्यपि सरकार ने अभी नही किया है पर आर.आई.एम.एफ की ब्याज दरों को आधार माने तो ब्याज दर 15 प्रतिशत से भी अधिक हो सकती है।

2.  जापान कुल योजना का 30 प्रतिशत यानी लगभग 33 हजार करोड़ के उपकरण व कोच भारत को देगा और अगर बाजार की दुनिया की सभ्य दरों के मुनाफे को कसौटी मान लें तो लगभग 20000 करोड़ का मुनाफा इसमें जापान को होगा।

3. जो इंजीनियर, इस योजना को क्रियान्वित करायेगें, वे अधिकांशतः जापानी होगे। जिनके वेतन पर भारी खर्च होगा। अगर पूरी परियोजना के लिये 200 तकनीकी विशेषज्ञ (जापानी) भारत में काम करेगें तो उन्हें कम से कम आगामी 7 वर्षो तक रहना होगा। तथा उनके वेतन व अन्य सुविधाओं पर लगभग 25 करोड़ रुपया प्रति माह याने 300 करोड़ रुपया प्रतिवर्ष देना होगा।

4. यह परियोजना का प्रथम चरण होगा तथा श्री मोदी की कल्पना फिलहाल देश में 10 हजार कि.मी. बुलेट ट्रेन की है याने भविष्य की 20 लाख करोड़ के व्यापार की संभावनायें खुली रहेगी।

5. अहमदाबाद-पूना बुलेट ट्रेन के निर्माण पर लगभग 200 करोड़ रुपये प्रति कि.मी. व्यय आयेगा। याने अगर देश में लंबित रेल परियोजनाओं को जिनमें काम के लिये, रेलवे अर्थाभाव का रोना रोती है को पूरा किया जाये तो इतनी राशि में लगभग 20000 किलोमीटर रेल लाईन देश में बन जाती जो भारत के वर्तमान में कुल रेल मार्ग का लगभग 30 प्रतिशत होता। आजादी के बाद के 68 वर्षो में भारत ने व-मुश्किल 20 से 30 हजार किलोमीटर रेल लाईन डाली है याने औसतन 40-50 किलामीटर प्रति वर्ष अगर भारत सरकार ने इस बुलेट ट्रेन के सपने को फिलहाल 10 वर्षो को छोड़ दिया होता तथा, देश की रेल लाईनों के लिये आगे बढ़ाते तो औसतन 2000 किलोमीटर रेललाईन प्रतिवर्ष डालती व देश की 100 करोड़ आबादी को रेल सुविधाओं की उपलब्धता होती।

6.  परंतु मोदी मानस में तो देश के विकास की कल्पना मात्र 4-5 करोड़ लोगों का विकास है।

7.  जापानी तंत्र का अंधिकाश काम तकनीक से होगा जो स्वचालित ज्यादा होगा इसमें स्थानीय रोजगार की संभानायें कम ही होगी।

8.   बुलेट ट्रेन का किराया हवाई किराये से लगभग दो गुना होता है। अभी लोगो का अनुमान है कि यह किराया रु.6 प्रति किलामीटर की दर से होगा याने मुंबई अहमदाबाद का किराया लगभग 3000 रुपये प्रति यात्री। पर यह गणित सही नहीं होगा क्योंकि, ट्रेन चलेगी आज से 8 वर्ष बाद तब तक रेल का किराया जिस रफ्तार से बढ़ रहा है बढ़ता रहा तो शायद 4500 से 5000 तक प्रति यात्री याने लगभग 9 से 10 रु. प्रति किलोमीटर किराया होगा। क्या इतना किराया, आम भारतीय को देना संभव होगा ?

9.   जे.आर्य.सी.ए. का अनुमान है कि वर्ष 2023 के बाद औसतन प्रति दिन 40 हजार यात्री इसमें यात्रा करेगें। पर यह प्रश्न अनुत्तरित है कि जिस यात्रा को हवाई जहाज से कम किराये में व 1 घंटे में यात्री पूरा करेगा उसी के लिये वह दो गुना किराया देकर दो गुने समय में क्यों करना चाहेगा?

बहरहाल यह बुलेट ट्रेन, परिचालन में कितना फायदा देगा यह तो भविष्य के गर्भ में है परंतु इतना तो निश्चित ही कहा जा सकता है कि बुलेट ट्रेन मोदी जी का ताजमहल सिद्व होगा। जिसे देखने के लिये दर्शक आयेंगे परंतु यात्रा के लिये शायद ही चंद लोग।

अभी भी समय है कि, श्री मोदी अपने हठयोग से बाहर निकल कर देश की जरुरत व क्षमता की दृष्टि से सोचे। वे गांधी के चित्र पर माला डालने के बजाय, गांधी के विचार की और लौटे। गति जरुरी तो है पर गति जोखिम भी है। अमर्यादित गति, यात्री को जोखिम में डालती है व सत्ताधीशों की दिशाहीन गति देश के लिये।ये उधार लेकर घी पीने की चार्वाक पंथी योजनाओं के बजाय पहले आगामी 10 वर्षो में, देश में, कम से कम 20000 किलोमीटर रेल लाईन बिछाने का सपना देखें। उसे क्रियान्वित करने की शुरुआत करें।विदेशी कर्ज के बजाय देशी स्रोत का प्रयोग करें।जब समूचे देश के गांव गरीब को रेल की सुविधा मिल जाये तब अगर वे बुलेट ट्रेन की ओर जायेगे तो, वह उचित हो सकता है।

मैं जानता हॅू कि, देश की इंटरनेट पीढ़ी के लिये, बुलेट ट्रेन भी एक सपना होगी। क्योंकि उसका संबध जीवन की वास्तविकताओं से नही है। वे सपनों में तेजी से उड़ान भरते है व तेजी से गिरते है। कही मोदी जी भी इसी के शिकार न हो जाये व देश को भी शिकार न बना दें ? व्यक्ति का जोखिम एक परिवार को प्रभावित करता है पर सत्ताधीशों के जोखिम समूचे देश व जनता को।

 

सम्प्रति – लेखक श्री रघु ठाकुर देश के जाने माने समाजवादी चिन्तक है।