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विधानसभा सहाय और तिवारी को श्रद्धांजलि देने के बाद स्थगित

रायपुर 06 फरवरी।छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ के प्रथम राज्यपाल स्वर्गीय दिनेश नंदन सहाय और अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरी शंकर अग्रवाल ने निधन उल्लेख करते हुए स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय और तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी का जीवन परिचय प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कुशल प्रशासनिक दक्षता और क्षमता के धनी स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय का छत्तीसगढ़ के प्रथम राज्यपाल के रुप में नवगठित राज्य के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान था। हर विषय की उन्हें गहरी जानकारी थी।स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय ने प्रथम राज्यपाल के रुप में अपनी मूल्यवान सेवाएं दीं। नवंबर 2000 से जून 2003 तक लगभग ढाई साल तक राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रुप में उन्होंने इस प्रदेश को अपना प्रशासनिक नेतृत्व दिया।

उन्होने कहा कि नये राज्य के प्रशासन के सामने कई चुनौतियां थीं। ऐसे समय में उनकी प्रशासनिक दक्षता का लाभ छत्तीसगढ़ को मिला। बिहार के मधेपुरा में एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे श्री दिनेश नंदन सहाय अपनी प्रतिभा और मेहनत से पहले प्राध्यापक और बाद में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बने। यह उनकी प्रशासनिक प्रतिभा का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कोई व्यक्ति अपने परिश्रम से सफलता की कितनी ऊंचाईयों पर पहुंच सकता है। उन्हें छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा के राज्यपाल के पद पर कार्य करने का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री ने तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके जैसा इतने लंबे समय तक काम करने का अवसर बिरले लोगों को मिलता है। वे ज्ञान का भंडार थे। तत्कालीन विंध्यप्रदेश की विधानसभा में सबसे लंबा भाषण देने का कीर्तिमान उनके नाम है। उन्हें विधानसभा के संचालन, कार्य प्रक्रिया की गहरी जानकारी थी। हममे से बहुत से लोग उन्हें व्यक्तिगत रुप से जानते हैं। उनसे हमारा गहरा लगाव था। समय-समय पर हमें उनका मार्गदर्शन मिलता रहा। मध्यप्रदेश बनने के चार साल पहले ही वे समाजवादी पार्टी से विंध्यप्रदेश की विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। जमींदारी प्रथा के उन्मूलन के लिए कई बार उन्होंने जन-आंदोलनों का नेतृत्व किया। सहकारिता आंदोलन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उन्हें रीवां का शेर कहा जाता था। वे गरिमा के साथ सदन का संचालन करते थे।

मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय और स्वर्गीय श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी के शोक संतप्त परिवारजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए दोनों विभूतियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

नेता प्रतिपक्ष श्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय द्वारा नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य को राज्यपाल के रुप में दी गयी सेवाएं और उनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। स्वर्गीय श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी दस वर्ष तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

संसदीय कार्य मंत्री श्री अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ को आकार देने में स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्वर्गीय श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी को श्रद्धाजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली को मजबूत बनाने में उनके फैसले विधानमंडलों के लिए नजीर बने रहेंगे।

उच्च शिक्षामंत्री श्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय, विधायक श्री अरुण वोरा, श्री सत्यनारायण शर्मा, श्री अमित जोगी और श्री भूपेश बघेल ने भी सदन में श्रद्धांजलि दी। सदन में दो मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय श्री दिनेश नंदन सहाय और स्वर्गीय श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।इसके बाद दोनो दिवंगतों के सम्मान में आज की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।