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लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं – उपराष्ट्रपति नायडू

रायपुर 01नवम्बर।उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने ’बुलेट’ से ज्यादा ताकत ’बैलेट’ (मतपत्र) को बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है।उन्होंने नक्सलियों से बंदूक छोड़ने और राज्य, देश तथा समाज की बेहतरी के लिए लोकतंत्र के रास्ते पर चलने का आव्हान किया है।

श्री नायडू ने आज शाम नया रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर पांच दिवसीय राज्योत्सव 2017 का शुभारंभ करते हुए कहा कि किसी भी देश में हिंसा से कोई क्रांति नहीं हो सकती।इसलिए नक्सलवादियों को अपनी भ्रांति से बाहर निकलकर मुख्यधारा में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी और प्रदेश की निरंतर प्रगति के लिए अपनी शुभेच्छा प्रकट की।

उन्होने कहा कि नक्सल हिंसा की गंभीर चुनौती के बावजूद छत्तीसगढ़ ने विगत 17 वर्षों में सामाजिक-आर्थिक विकास के सभी क्षेत्रों में सराहनीय सफलताएं हासिल की हैं।उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह और प्रदेश सरकार को बधाई और शुभकामनाएं दी।उन्होने कहा कि नक्सल हिंसा की वजह से प्रदेश के कुछ इलाकों में विकास प्रभावित हो रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इन इलाकों के शांतिपूर्ण विकास और वहां की जनता की बेहतरी के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है, जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं।राष्ट्रगान के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ।मुख्यमंत्री ने श्री नायडु को स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के खुले में शौच मुक्त घोषित तेरह जिलों को सम्मानित करते हुए बधाई दी।

राज्योत्सव के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन ने और सम्मानित विशिष्ट अतिथि की आसंदी से मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने भी जनता को सम्बोधित किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने अपने उदबोधन में देश और राज्यों के विकास के लिए सुशासन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि गरीबी उन्मूलन और भ्रष्टाचार उन्मूलन के साथ-साथ हम सबको सभी क्षेत्रों के संतुलित विकास पर ध्यान देना होगा। छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि छत्तीसगढ़ सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के मार्ग पर चलकर समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। गांव, गरीब और किसानों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है।