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म.प्र. में ‘राजपथ’ पर विचरण का लालच संजोती ‘सियासी यात्राएं’-अरुण पटेल

अरूण पटेल

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट अब साफ-साफ महसूस होने लगी है और राजनीतिक दल राजपथ पर विचरण की लालसा में तरह-तरह की यात्राएं निकाल रहे हैं। भाजपा किसान सम्मान यात्रा निकाल रही है तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने कांग्रेस के बैनर तले न्याय यात्रा का आगाज कर दिया है।यह न्याय यात्रा कई चरणों में विभिन्न मुद्दों को लेकर निकलेगी। विधानसभा चुनाव में किसान एक अहम् मुद्दा होगा, इसलिए कांग्रेस भी किसान कलश यात्रा निकालने जा रही है।

भाजपा और कांग्रेस किसान यात्राएं निकाल रही हैं तो आम आदमी पार्टी कहां पीछे रहने वाली वह भी 11 अप्रैल से 14 मई तक पूरे प्रदेश में ‘किसान बचाओ बदलाव लाओ’ यात्रा के तहत प्रदेश के सभी 42 हजार मतदान केंद्रों तक मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति करेगी। इस यात्रा के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों में पोहा चौपाल लगायेंगे। इसी बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की आध्यात्मिक और धार्मिक नर्मदा यात्रा 192वें दिन 9 अप्रैल को पूरी होने जा रही है, जिसे एक मेगा इवेन्ट का रूप दिया जा रहा है। आध्यात्मिक और धार्मिक यात्रा दिग्विजय सिंह ने पूरे विधि-विधान और रीति-रिवाज से अपनी धर्मपत्नी अमृता सिंह के साथ पूरी कर ली है। उनकी इस यात्रा के बाद आध्यात्मिक और धार्मिक शक्ति से लेस होकर दिग्विजय सिंह की अगली राजनीतिक यात्रा कैसी होगी, इसका जितनी बेसब्री से कांग्रेस को इंतजार है उससे अधिक इसके फलितार्थ पर भाजपा की नजर भी टिकी हुई है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यात्राओं के माध्यम से भाजपा का लक्ष्य राजपथ पर पांच साल और अपना विचरण सुनिश्‍चित करना है तो कांग्रेस की लालसा यह है कि वह भी यात्राओं के जरिए 2018 के बाद प्रदेश के राजपथ पर भाजपा की जगह स्वयं को स्थापित करे। ‘आप’ की चाहत है कि सत्ता की चाबी उसकी मुट्ठी में आ जाए।

दिग्विजय सिंह आध्यात्मिक व धार्मिक रूप से की गई अपनी 192 दिन की नर्मदा परिक्रमा यात्रा के बाद फिर से राजनीति में सक्रिय होंगे। एक वास्तविकता यह है कि दिग्विजय सिंह ने नर्मदा अंचल में कांग्रेसजनों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है और अब उनकी कोशिश यह होगी कि प्रदेश में कांग्रेसजनों को एक साथ बिठायें, उनको एकजुट करें और जहां कहीं किसी के बीच मतभेद हैं उसे दूर कर कांग्रेस को प्रदेश में फिर से सत्ता में लाने का मार्ग प्रशस्त करें। आज भी पूरे मध्यप्रदेश के बारे में जितनी बारीक जानकारी दिग्विजय को है उतनी और किसी को नहीं है। दिग्विजय सिंह की क्या भूमिका रहेगी इस पर भी यह बात बहुत कुछ निर्भर करेगी कि डेढ़ दशक से प्रदेश में चल रहा कांग्रेस का वनवास समाप्त होगा या नहीं। दिल्ली की राजनीति में प्रदेश के जो भी नेता सक्रिय हैं उनमें से दिग्विजय ऐसे एकमात्र नेता हैं जिन्हें पूरे प्रदेश की जमीनी हकीकत  और कार्यकर्ताओं के मानस एवं क्षमता की पूरी जानकारी है।

प्रादेशिक नेताओं में अरुण यादव और अजय सिंह के बीच अच्छी ट्यूनिंग हो गई है और दिग्विजय सिंह, कमलनाथ तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच भी यदि परस्पर विश्‍वास की ट्यूनिंग हो सकी तो ही कांग्रेस भाजपा के लिए कोई बड़ी चुनौती खड़ी कर पायेगी। अब कांग्रेस की चुनावी रणनीति व जमावट भी अगले दस-पन्द्रह दिन में आकार ले लेगी और किस नेता को क्या जिम्मेदारी मिलना है और किसकी क्या भूमिका है…।

 

सम्प्रति-लेखक श्री अरूण पटेल अमृत संदेश रायपुर के कार्यकारी सम्पादक एवं भोपाल के दैनिक सुबह सबेरे के प्रबन्ध सम्पादक है।