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मुलायम के बाद अमर सिंह ने ‘जीवन’ मोदी को समर्पित किया – उमेश त्रिवेदी

उमेश त्रिवेदी

सिर्फ भाजपा के जन्मांक 6 अप्रैल 1980 से शुरू करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक भक्ति-धारा में पिछले 38 सालों में सबसे ज्यादा राज-भक्त ही जुड़े हैं। मोदी की भक्ति धारा के नए नक्षत्रों में अब समाजवादी नेता अमरसिंह भी शरीक हो गए हैं। प्रधानमंत्री के भक्त-शिरोमणियों का राजनीतिक गंडा हासिल करने के लिए अमरसिंह की आकुलता और व्याकुलता इन शब्दों में अभिव्यक्त होती है कि ’उनका जीवन अब नरेन्द्र मोदी के लिए समर्पित है।’ हिन्दी-अलंकारों की दृष्टि से अमर सिंह की यह अभिव्यक्ति भावालंकार की श्रेणी में आती है। अमरसिंह की अभिव्यक्ति इस भक्ति गीत का भावानुवाद है कि ’जीवन का मैंने सौंप दिया, सब भार तुम्हारे हाथों में, उत्थान पतन अब मेरा है सरकार तुम्हारे हाथों में’। इस भक्ति गीत के 6 छंदो में ’अमर-भावनाओं’ के 6 अलग-अलग ’शेड’ मोदी के आभा-मंडल को अलंकृत करते हैं।

यह कहना मुश्किल है कि राजनीतिक मोक्ष की तलाश में तन-मन-धन से जुटे अमर सिंह की भक्ति-मार्ग का यह अंतिम पड़ाव है, अथवा इससे उनके व्याकुल मन को शांति मिल पाएगी अथवा नहीं, लेकिन फिलवक्त उनके झांझ-मंजीरों की झंकार से भाजपा के राज मंदिर में कौतूहल का माहौल गहरा रहा है। मोदी के पुराने भक्तों में चिंता का भाव है कि अमरसिंह कहीं मोदी-भक्ति के शिखर को हासिल नहीं कर लें?  उल्लेखनीय है साक्षी महाराज के अनुसार श्रीराम की तरह कलयुग में असुरों का नाश करने के लिए मोदी का अवतार हुआ है। 17 अप्रैल 2015 में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने नरेन्द्र मोदी में सम्राट अशोक की आत्मा के दर्शन किए थे। 5 अगस्त 2015 को तत्कालीन मंत्री और वर्तमान उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मोदी को राष्ट्र के लिए ईश्वर की देन माना था। उमा भारती ने 5 जून 2015 को कहा था कि मोदी एक हजार साल बाद पैदा होने वाले मसीहा हैं, जो भारत की जरूरत हैं। मोदी में राम-कृष्ण और सम्राट के दर्शन करने वाले नेताओं के क्रम में अमर सिंह का समर्पण नया इतिहास रचने जा रहा है।  ’सूर सूर तुलसी ससी, उडुगन केशव दास, अब के कवि खद्योत सम, जहं-तहं करत प्रकाश’ की तर्ज पर पुराने मोदी-भक्त आकुलता से देख रहे हैं कि अमर सिंह मोदी की भक्ति-धारा में सूरदास, तुलसीदास अथवा केशव सिद्ध होंगे अथवा छोटे मोटे नक्षत्रों की तरह राजनीतिक फलक पर टिमटिमाते रहेंगे।

हिंदी साहित्य का भक्ति युग  सगुण भक्ति और निर्गुण भक्ति की काव्यधाराओं में विभाजित है सगुण-भक्ति के अंतर्गत राम याने रामाश्रयी शाखा और कृष्ण याने कृष्णामयी शाखा आती है। राजनीति की भक्ति धारा में अमर सिंह सगुण-भक्ति धारा के संवाहक हैं। पहले वो मुलायम सिंह के राजनीतिक पूजा-पाठ में लीन रहते थे। अब  मोदी के मंदिर में झांझ-मंजीरा लेकर बैठे हैं। यह दिलचस्प है कि सगुण भक्ति-धारा की रामाश्रयी शाखा और कृष्णामयी धारा की तरह वर्तमान राजनीति भी राम और कृष्ण की धुरी पर घूम रही है।

अमर सिंह राजनीतिक भक्ति के अनगिन प्रवाहों में सत्ता का आचमन करते रहे हैं, लेकिन सबसे पहले उन्हें प्रसिद्घि कृष्णमयी धारा याने मुलायम सिंह के मठ में मिली थी। मुलायम सिंह यादव होने के कारण खुद को भगवान कृष्ण के वंशजां में शुमार करते हैं। मोदी की शरण में अमर सिंह भक्ति काव्य धारा की रामाश्रयी शाखा में राजनीतिक-मोक्ष तलाश कर रहे हैं। मोदी की ’राजनीतिक-प्रभुता’ में राम और सिर्फ राम ही विराजमान हैं।  डेढ़ दशक से अमर सिंह कृष्ण-वंशज मुलायम सिंह की कृष्णमयी राजनीतिक स्तुति में लीन रहे हैं। अपने माथे पर यादव परम्परा का मोर-मुकुट धारण करने वाले अमर सिंह के मुखारविंद से मोदी की रामाश्रयी आरती और घंटा-वादन राजनीतिक हलकों में कौतुहल पैदा कर रहा है कि अब उनकी राजनीतिक-गीतिकाओं के पद और सुर कैसे होंगे?

अमरसिंह का यह एपीसोड काफी दिलचस्प रहने वाला है। उनकी राजनीतिक-नाट्यशैली  निर्विवाद है। डेढ़ साल से हाशिए पर खड़े अमर सिंह को जनवरी 2017 में सपा से निकाल दिया गया था। उसके बाद कांग्रेस में राजनीतिक शरण भी उन्हें नहीं मिली। अब वो  मोदी और भाजपा की ओर मुखातिब हुए हैं। कई दिनों से मोदी के कामों के कसीदे काढ़ने वाले अमर सिंह को 29 जुलाई 2018 को उप्र प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद मिल गया है। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अमर सिंह भगवा कुर्ता और ग्रे-कलर की जैकेट पहन कर मोदी के समक्ष प्रस्तुत हुए थे। उद्योगपतियों के बीच अमर सिंह की कूबत की तारीफ करते हुए मोदी ने कहा था कि ’अमरसिंहजी बैठे हैं, वो गुपचुप होने वाली दलाली की पूरी हिस्ट्री निकाल सकते हैं’। मोदी का संबोधन भाजपा में उनके प्रवेश की पुष्टि माना जा रहा है। भाजपा अमर सिंह का उपयोग सपा और बसपा में फूट डालने के लिए करने वाली है। अमर सिंह भाजपा की ओर से उद्योगपतियों से भी लायजनिंग करने वाले हैं।

 

सम्प्रति- लेखक श्री उमेश त्रिवेदी भोपाल एनं इन्दौर से प्रकाशित दैनिक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है। यह आलेख सुबह सवेरे के 31 जुलाई के अंक में प्रकाशित हुआ है।वरिष्ठ पत्रकार श्री त्रिवेदी दैनिक नई दुनिया के समूह सम्पादक भी रह चुके है।