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महाराष्ट्र में जारी उठापटक के बीच शिवसेना के दोनों गुटों में समझौते को लेकर शुरू हुई चर्चा

महाराष्ट्र में जारी उठापटक के बीच शिवसेना के दोनों गुटों में समझौते को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि कम से कम एक दर्जन शिवसेना लोकसभा सांसद उनके संपर्क में हैं। भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि महाराष्ट्र में शिवसेना में विभाजन का लोकसभा पर भी असर पड़ेगा क्योंकि कुल 19 में से कम से कम एक दर्जन लोकसभा सदस्य दल बदलने के लिए तैयार हैं। हालांकि इस बीच खबर है कि शिवसेना सांसदों का एक वर्ग शिंदे और ठाकरे में सुलह कराने के पक्ष में है।
भाजपा नेता का दावा शिवसेना सांसदों के एक वर्ग ने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से कहा कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ अपने मतभेद दूर करें। भाजपा के नेताओं ने दावा किया है कि बगावत से प्रभावित शिवसेना के कम से कम 12 लोकसभा सदस्य उनके संपर्क में हैं। भाजपा के एक नेता और केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि महाराष्ट्र में शिवसेना में विभाजन का लोकसभा पर भी असर पड़ेगा क्योंकि पार्टी के कुल 19 में से कम से कम 12 लोकसभा सदस्य पाला बदलने के लिए तैयार हैं। शिवसेना के सांसदों ने दिया सुझाव शिवसेना के सूत्रों ने कहा कि मुंबई में ठाकरे द्वारा बुलाई गई शिवसेना सांसदों की बैठक में एक वरिष्ठ नेता ने पार्टी के हितों के लिए शिंदे के नेतृत्व वाले बागी समूह के साथ सुलह करने का सुझाव दिया। सुझाव पर ठाकरे की प्रतिक्रिया का पता नहीं चल पाया है। शिवसेना की बैठक में नहीं पहुंचे तीन सांसद बताया जा रहा है कि बैठक में तीन सांसदों-मुख्यमंत्री शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे, प्रवर्तन निदेशालय की जांच के घेरे में आ चुकीं भावना गवली और राजन विचारे ने हिस्सा नहीं लिया। शिवसेना के लोकसभा में 19 सदस्य और राज्यसभा में तीन सदस्य हैं। कल्याण से लोकसभा सदस्य श्रीकांत पहले ही अपने पिता के खेमे से जुड़ चुके हैं, जबकि यवतमाल से सांसद भावना गवली ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर हिंदुत्व के संबंध में बागी नेताओं की शिकायतों पर विचार करने का आग्रह किया था। राजन विचारे लोकसभा में ठाणे सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। बागी विधायक वापस आएंगे: संजय राउत इन बीच शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने बागी विधायकों के वापस पार्टी में लौटने की उम्मीद भी जताई है। राउत ने कहा कि अगर किसी को गुमराह कर, फंसाकर लेकर गए हैं तो हमें अभी भी उम्मीद है कि वे वापस आएंगे। वे भी हमारे ही लोग हैं। सुबह का भूला शाम को लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। यह जो भूले बिसरे लोग हैं आ जाएंगे।