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प्रधानमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले जिलों में 10 छत्तीसगढ़ के

रायपुर 25 नवम्बर।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्राथमिकता वाले देश के 115 पिछड़े जिलों में राज्य के  नक्सल हिंसा पीड़ित आठ जिलों सहित कोरबा और महासमुन्द जिलों को भी शामिल किया गया है।

नक्सल समस्या ग्रस्त राजनांदगांव जिले को और बस्तर संभाग के सभी सात जिले बस्तर (जगदलपुर), कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा भी इनमें शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने इस फैसले पर खुशी जताई है और प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया है। उन्होंने आज कहा कि प्रधानमंत्री के इस निर्णय से बस्तर अंचल सहित प्रदेश के अन्य तीन जिलों में भी विकास के लिए राज्य और केन्द्र अब और भी अधिक तालमेल के साथ काम करेंगे।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक नये भारत के निर्माण के अपने विजन को अमलीजामा पहनाने के लिए देश के 115 पिछड़े जिलों को चिन्हांकित किया है और इन जिलों के त्वरित विकास के लिए केन्द्र सरकार की ओर से अखिल भारतीय सेवाओं के 115 वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभारी अधिकारी का दायित्व सौंपा है। इनमें से अधिकांश भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और केन्द्रीय मंत्रालयों में कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री की विशेष प्राथमिकता सूची में शामिल छत्तीसगढ़ के दस जिलों के लिए केन्द्र सरकार ने प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है।इनमें से राजनांदगांव जिले के लिए अमित सहाय, बस्तर (जगदलपुर) जिले के लिए मनोज कुमार पिंगुआ, कांकेर के लिए अनिल मलिक, कोण्डागांव के लिए दिलीप कुमार, नारायणपुर के लिए संदीप पोंडरिक, बीजापुर के लिए प्रशांत कुमार, सुकमा के लिए अमित अग्रवाल और दंतेवाड़ा के लिए भरत हरबंस लाल खेरा, महासमुन्द जिले के लिए निधि छिब्बर और कोरबा जिले के लिए सुनिल भरतवाल को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है।