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पुलिस बालकों के साथ सामान्य अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं करे-विज

रायपुर 28अप्रैल।छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक(अपराध अनुसंधान विभाग)आर.के. विज ने कहा हैं कि पुलिस अधिकारियों को बच्चों के मामले में सामान्य अपराधियों जैसे व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

श्री विज ने आज यहां पुलिस अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की सबसे अधिक जिम्मेदारी उसके परिवार और विद्यालय की होती है। इसके बावजूद भी वर्तमान परिवेश में जिस तरह से बालकों के विरूद्ध और बालकों द्वारा घटित अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, इस पर नियंत्रण एवं बालकों के सर्वोत्तम हित में कार्य करने के लिए पुलिस की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 व आदेश नियम 2016 में बालकों के हित को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को बच्चों के मामले में सामान्य अपराधियों जैसे व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। विशेषतौर पर महिला पुलिस अधिकारियों को ज्यादा संवेदनशील होना पड़ेगा जिससे शोषण से पीड़ित बच्चे महिला पुलिस अधिकारी को अपनी बात आसनी से बता सकें।

श्री विज ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को प्रत्येक थाने में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से यह भी पता लगाने का भी प्रयास करना चाहिए कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां या वातावरण जिम्मेदार है कि बच्चों का शोषण हुआ अथवा बच्चे का ध्यान अपराध की ओर आकर्षित हुआ, ऐसे कई कारण हो सकते है जैसे कि बच्चे के माता-पिता दोनां कामकाजी हो या मजदूरी करते हो या अन्य परिवारिक कारण भी हो सकते है।

श्री विज ने गुमशुदा बच्चों के तलाश के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि यह समस्या देशभर में है, इससे छत्तीसगढ़ भी ज्यादा प्रभावित है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर राज्य पुलिस द्वारा अभियान चलाकर गुमशुदा बच्चों की तलाश करने का कार्य किया गया है। इसमें अच्छी सफलता भी मिली है, फिर भी बच्चों की गुमशुदगी के मामले में वृद्धि हो रही है। पुलिस अधिकारियों को बच्चों की गुमशुदगी के प्रकरण भी तत्काल दर्ज कर कार्रवाई प्रारंभ करना चाहिए।