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नक्सल प्रभावित इलाकों में अधोसंरचना विकास में मिली शानदार कामयाबी- मूणत

रायपुर 07 दिसम्बर।छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण, आवास और पर्यावरण मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी संरचनाओं के विकास को प्रदेश सरकार ने एक चुनौती के रूप में लिया और इस दिशा में विगत 14 वर्षों में शानदार कामयाबी हासिल की।

श्री मूणत आज यहां स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों को प्रदेश सरकार के 14 वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि 21वीं सदी के स्मार्ट शहर के रूप में तेजी से विकसित हो रहे नया रायपुर में वर्ष 2030 तक पांच लाख आबादी को बसाहट देने का लक्ष्य है। नया रायपुर में मंत्रालय और विभागाध्यक्ष भवनों सहित कई सरकारी दफ्तरों के भवनों और कई आवासीय कालोनियों का निर्माण किया गया है।परिवहन विभाग द्वारा आम जनता की सुविधा के लिए राज्य में सभी चेक पोस्ट खत्म कर दिए गए हैं और सभी जिला परिवहन कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण करते हुए उन्हें आनलाइन कर दिया गया है।पर्यावरण सुधार की दृष्टि से ई-रिक्शों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने ई-रिक्शों को परिवहन टैक्स से पांच वर्ष के लिए छूट देने का भी निर्णय लिया है।

उन्होने कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा  प्रदेश के सभी 27 जिलों में जनसुविधाओं की दृष्टि से विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर करवाए जा रहे हैं।  नक्सल क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग को जनता के लिए अधोसंरचनाओं के विकास में लगातार कामयाबी मिल रही है। सुकमा जिले में दोरनापाल-चिंतलनार सड़क और शबरी नदी पर 500 मीटर पुल निर्माण इसका एक बड़ा उदाहरण है।

श्री मूणत ने बताया कि नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अब तक 1890 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों के लिए केन्द्रीय योजना (एल.डब्ल्यू. ई. योजना) के तहत 1326 किलोमीटर सड़कें बनायी जा चुकी है। बस्तर अंचल में ही 138 नग पुलों का निर्माण किया गया है। श्री मूणत ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में 1962 किलोमीटर सड़कों को राजमार्ग और 12432 किलोमीटर सड़कों को मुख्य जिला मार्ग घोषित किया गया है।

    उन्होंने बताया कि राज्य निर्माण के समय लोक निर्माण विभाग का वार्षिक बजट सिर्फ 229 करोड़ रूपए होता था, जो आज 34 गुना बढ़कर 7795 करोड़ रूपए तक पहुंच गया है। पहले सीमित बजट के कारण नई सड़कों के निर्माण और रख-रखाव में काफी मुश्किलें आती थी। मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने इसे संज्ञान में लिया और जनसुविधा की दृष्टि से प्रदेश में सड़कों और पुल-पुलियों का बेहतर नेटवर्क विकसित करने तथा शासकीय भवनों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर विभाग के बजट में वर्ष 2003-04 से लगातार वृद्धि की।