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छत्तीसगढ़ गठन के पहले एवं बाद का भी इतिहास लिखा जाना चाहिए-रमन

रायपुर 14 अक्टूबर।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि नया राज्य बनने के पहले और नया राज्य बनने के बाद के छत्तीसगढ़ का इतिहास भी लिखा जाना चाहिए। अब तक जो लिखा गया है उसे भी नये स्वरूप में और भी अधिक अच्छे ढंग से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

डा.सिंह ने आज शाम यहां अपने निवास में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित आठ दुर्लभ पुस्तकों का विमोचन करते हुए यह विचार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास, महापुरूषों, जनजातियों, छत्तीसगढ़ की संस्कृति, पर अकादमी द्वारा प्रारंभ की गई पुस्तकों के प्रकाशन की श्रृंखला नई पीढ़ी के लिए ज्ञानवर्धक और काफी उपयोगी साबित होगी। मुख्यमंत्री ने पुस्तकों के प्रकाशन पर अकादमी को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी छत्तीसगढ़ के इतिहास और महापुरूषों को जानने और समझने का और उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के हर जिले का इतिहास लिखने के लिए छत्तीसगढ़ के स्थानीय इतिहासकारों और लेखकों का सहयोग लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित जिन पुस्तकों का विमोचन किया, उनमें सत्रहवीं सदी के कवि श्री गोपाल मिश्र की कृति ‘खूब तमाशा’, रचनाकाल-(सन् 1689) का भी विमोचन किया, जिसका संपादन 83 वर्षीय साहित्यकार डॉ. शेषनारायण चंदेले ने किया है। मुख्यमंत्री ने समारोह में डॉ. चंदेले को विशेष रूप से सम्मानित किया।

समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र सिंह कैम्बो विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पद्मश्री सम्मानित डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय, वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. रमेन्द्रनाथ मिश्र, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति प्रो. एस.के. पाण्डेय, वरिष्ठ साहित्यकार श्री तेजिन्दर सिंह गगन और संचालक जनसम्पर्क श्री राजेश सुकुमार टोप्पो सहित अनेक स्थानीय साहित्यकार, पत्रकार और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।