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अशोक चव्हाण के खिलाफ अदालती कार्रवाई की अनुमति रद्द

मुबंई 22दिसम्बर।बंबई उच्च न्यायालय ने आज आदर्श आवास समिति घोटाले में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के खिलाफ अदालती कार्रवाई के लिए दी गयी राज्यपाल की स्वीकृति को रद्द कर दिया।

न्यायालय ने कहा कि सीबीआई ने राज्यपाल से अनुमति प्राप्त करते समय श्री चव्हाण के खिलाफ कई नये सबूत होने का दावा किया था, लेकिन वह इन्हें प्रस्तुत करने में असफल रही है।उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने आदर्श आवास घोटाले में अदालती कार्रवाई की स्वीकृति दिये जाने के खिलाफ श्री चव्हाण की याचिका पर सुनवाई करते हुए आज अपना आदेश सुनाया।

न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और साधना जाधव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अशोक चव्हाण की याचिका पर सुनवाई के बाद राज्यपाल के फैसले को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरो को अभी तक कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं कर पाई है। याचिका अशोक चव्हाण द्वारा दायर की गई थी। फरवरी 16 में राज्यपाल ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को अनुमति दी थी कि वो चव्हाण पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मुकदमा चला सकती है।

सीबीआई ने श्री चव्हाण पर आरोप लगाया था कि उन्होंने दक्षिणी मुंबई में आदर्श आवास समिति की बहुमंजिला इमारत में नियमों का उल्लंघन कर एक और मंजिल बनाने की इजाजत के लिए अपने रिश्तेदारों के लिए दो फ्लैट लिये थे।