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अमेरिका में फ्रीडम डे परेड के दौरान हुई गोलीबारी में कम से कम छह की मौत और 30 लोग हुए घायल

Chicago shooting : अमेरिका में चार जुलाई के फ्रीडम डे परेड के दौरान गोलीबारी में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हुए हैं। यह घटना इलिनायस प्रांत के शिकागो शहर के उपनगर हाइलैंड पार्क में हुई है। अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस में छह लोगों के मारे जाने और 24 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। गोलीबारी की घटना के मद्देनजर 22 साल के एक युवक राबर्ट इ क्रिमो (Robert E. Crimo, III) को हिरासत में लिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है क‍ि अमेरिका में यह गन कल्‍चर कितना पुराना और लोकप्रिय है? इस गन कल्‍चर के चलते अब तक कितनी लोगों की जानें गईं हैं? अमेरिका में इस गन कल्‍चर की शुरुआत कब हुई? क्‍या इसे रोकने के लिए कोई कानून है? इन तमाम मसलों को उकेरती हुई ये र‍िपोर्ट।
1- अमेरिका का संविधान अपने नागरिकों को बंदूक या गन रखने का पूरा अधिकार देता है। भारत में बंदूक लेने के लिए आपको लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन अमेरिका में ऐसा कुछ भी नहीं है। भारत में ब‍िना लाइसेंस के बंदूक रखना बहुत बड़ा जुर्म है। इसकी बड़ी सजा है। उधर, अमेरिकी नागर‍िकों को गन वहां की दुकानों में बहुत आसानी से सुलभ है। आप किसी भी अमेरिकी दुकानों में अपनी पंसद की गन खरीद सकते हैं। 2- पिछले 50 वर्षों में अकेले अमेरिका 14 लाख लोगाें बंदूक से होने वाली हिंसा में मारे जा चुके हैं। अमेरिका में बंदूक की संस्‍कृति उस जमाने से है, जब वहां ब्रिटिश सरकार का राज हुआ करता था। तब अमेरिका मे कोई सुरक्षा एजेंसी नहीं थी, लोगों को अपनी और परिवार की सुरक्षा खुद करनी होती थी। यह वह देश है, जहां पुलिस नहीं थी। इसलिए लोगों से कहा गया कि आप अपने हथ‍ियार खरीद लीजिए और अपनी सुरक्षा स्‍वयं करिए। इसलिए उन्‍हें हथियार रखने की आजादी मिली। 19वीं शताब्‍दी तक अमेरिका को यह समझ में आ गया था कि देश में बंदूक कल्‍चर कभी शांति स्‍थापित नहीं होने देगा लेकिन गन लाबी और कुछ नेताओं के दबाव के चलते कभी भी इसके खिलाफ कोई सख्‍त कानून नहीं बन पाया। आज अमेरिका में गन से औसतन 100 लोग रोज मारे जाते हे। 3- अमेरिका में गल कल्‍चर का इतिहास उतना ही पुराना है कि जितना पुराना अमेरिका का संविधान है। वर्ष 1791 में अमेरिका के संविधान में दूसरा संशोधन लागू हुआ था। इसके तहत अमेरिकी नागरिकों को हथियार रखने का हक दिया गया था। लेकिन इन अधिकारों की एक कीमत थी। अमेरिका में दशकों तक गन कल्‍चर से लाखों लोगों ने अपनी जानें गवाई। इन मौतों का बोझ अमेरिकी संसद पर समय के साथ बढ़ता चला गया। आज तक अमेरिका इस काूनन को बदल नहीं पाया है। अमेरिका की जिस संसद से यह उम्‍मीद करते हैं कि वह इसके खिलाफ सख्‍त कानून बनाएगी वहीं उस संसद से कुछ दूरी पर गन की बड़ी-बड़ी कई दुकानें हैं, जहां अमेरिकी नागरिक आाधुनिक हथियार खरीद सकते हैं। 4- 2019 की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसके मुताबिक पूरे अमेरिका में 63 हजार से ज्‍यादा लाइसेंस गन डीलर हैं, जिन्‍होंने अमेरिका नागरकिों को 80 हजार करोड़ रूपये से ज्‍यादा की बंदुके बेची थी। यह भारत के इस वर्ष के स्‍वास्‍थ्‍य बजट से काफी ज्‍यादा था। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि अमेरिका में गन कल्‍चर कितना लोकप्र‍िय है। वहां के कई अमेरिकी राष्‍ट्रपतियों ने इस खुब बढ़ावा दिया। हालांकि, अब यह अमेरिकी सरकार के लिए चिंता का विषय है। यही कारण है कि ओबामा समेत कई राष्‍ट्रपतियों ने गल कल्‍चर के खिलाफ आवाज उठाई। गन कल्‍चर पर अमेरिकी शीर्ष अदालत का बड़ा फैसला 1- हाल में अमेरिकी शीर्ष अदालत ने गन कल्चर पर बड़ा फैसला दिया था। अमेरिकन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घर के बाहर गन लेकर चलना लोगों का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी कानून से इसे सीमित नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि घर के बाहर सड़कों या अन्य सार्वजनिक जगहों पर हथियार लेकर चलना लोगों का संवैधानिक अधिकार है। अगर सरकार इस अधिकार को नियंत्रित करने का प्रयास करती है तो यह संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन होगा। इसके साथ ही अदालत ने न्यूयार्क प्रांत की ओर से गन कल्चर को कंट्रोल करने के लिए बनाए गए एक कानून को भी रद कर दिया। अदालत का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब टेक्सास, न्यूयार्क और कैलिफोर्निया में हाल ही में मास शूटिंग की कई घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में दर्जनों निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 2- गौरतलब है कि न्यूयार्क प्रांत में गन कल्चर को रोकने के लिए एक कानून बनाया गया था। इस कानून के मुताबिक घर से बाहर हथियार ले जाने पर पुलिस को इसका उपयुक्त कारण बताना होता था। यह कारण न बताने पर पुलिस उस हथियार को जब्त कर सकती थी। इस कानून की वजह से न्यूयार्क में हथियारों की बिक्री में गिरावट आ रही थी। इसके बाद न्यूयार्क स्टेट राइफल एंड पिस्टल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस कानून को खारिज करवाने की मांग की थी।